तेहरान: ईरान ने अमेरिकी यात्रा प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना करते हुए इसे शत्रुतु और भेदभावपूर्ण करार दिया। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने कहा कि अमेरिका का यह कदम न केवल ईरान के नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय मानकों और मानवीय मूल्यों के खिलाफ भी है।
अमेरिकी सरकार ने हाल ही में ईरान के नागरिकों पर यात्रा प्रतिबंध लागू किया था, जिससे ईरान के विश्वविद्यालयों और अन्य प्रमुख संस्थाओं में कार्यरत प्रोफेसरों, छात्रों और अन्य नागरिकों के लिए अमेरिका यात्रा मुश्किल हो गई है। इस प्रतिबंध के तहत कई ईरानी नागरिकों को शैक्षिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए अमेरिकी वीजा प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा है।
-देश के नागरिकों के साथ अन्याय
कनानी ने कहा, “यह प्रतिबंध न केवल हमारे देश के नागरिकों के साथ अन्याय है, बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के द्वारा स्थापित किए गए कानूनी और मानवाधिकार मानकों के भी खिलाफ है। अमेरिका का यह कदम दिखाता है कि वह अपने राजनीतिक उद्देश्यों को लेकर पूरी दुनिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।”
अमेरिकी प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान के खिलाफ दबाव बनाना और उसे अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अपनी नीतियों में बदलाव करने के लिए मजबूर करना है। हालांकि, ईरान का कहना है कि यह प्रतिबंध केवल लोगों के जीवन को प्रभावित करता है और इसका वास्तविक उद्देश्य लोगों के बीच तनाव और संघर्ष बढ़ाना है।
-अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
कई अंतर्राष्ट्रीय संगठन और मानवाधिकार समूहों ने भी इन यात्रा प्रतिबंधों की आलोचना की है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग ने इस कदम को ‘अमानवीय’ और ‘भेदभावपूर्ण’ करार दिया है, वहीं कई अन्य देशों ने इस मुद्दे पर अमेरिका से अपने फैसले को पुनः विचारने की अपील की है।