Last Updated: November 5, 2026

Dainik Savera Times Logo

ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान का चुनाव पर पड़ा असर, ट्रंप ने स्वीकारी बात

November 5, 2026

ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान का चुनाव पर पड़ा असर, ट्रंप ने स्वीकारी बात

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकारा है कि ईरान संघर्ष का मिडटर्म चुनावों पर असर पड़ा और उनकी उनकी रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने इसकी एक वजह पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी को बताया, हालांकि साथ ही स्पष्ट किया कि अगर उन्हें दोबारा ऐसा फैसला लेने का मौका मिले तो वह फिर सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुनेंगे।

बुधवार को व्हाइट हाउस में प्रस्तावित बॉलरूम के निर्माण कार्य की प्रगति से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के साथ संघर्ष ने चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के खराब प्रदर्शन में भूमिका निभाई है। इस पर ट्रंप ने कहा, ”मुझे लगता है कि यह काफी हद तक सही है।” उन्होंने स्वीकार किया कि इस कारण अल्पावधि में पेट्रोल की कीमतें बढ़ गईं, जिसका असर चुनाव पर पड़ा। हालांकि, उन्होंने सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा, ”अगर मुझे दोबारा ऐसा करना पड़े तो मैं फिर करूंगा।”

‘ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे’

ट्रंप ने दलील दी कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान के खिलाफ संघर्ष राजनीतिक नुकसान के बावजूद उचित था, ट्रंप ने कहा, ”हां, बिल्कुल।” उन्होंने दावा किया कि उन्हें तेल की कीमतों में इससे कहीं अधिक तेज उछाल आने की आशंका थी, लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी उतनी नहीं हुई।

ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को चुनावी फायदे-नुकसान के बजाय अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा फैसला बताया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में ईरान की नौसेना, वायुसेना और हवाई रक्षा प्रणालियों को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि होर्मुज से तेल की आपूर्ति युद्ध से पहले के मुकाबले बढ़ गई है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आंकड़ा पेश नहीं किया।

‘पहले पता था, संघर्ष का चुनाव पर असर पड़ेगा’

चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन को लेकर उपराष्ट्रपति की टिप्पणी के संबंध में भी ट्रंप से सवाल किए गए। एक पत्रकार ने संघर्ष और चुनावी नतीजों के बीच संबंध बताने वाली उपराष्ट्रपति की एक विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें पहले से पता था कि संघर्ष का चुनाव पर असर पड़ेगा। वह उपराष्ट्रपति की सोच से परिचित थे और उनकी पोस्ट से सहमत भी थे।

उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया कि ईरान के साथ संघर्ष की राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी है, लेकिन स्पष्ट किया कि इससे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। संघर्ष कब समाप्त होगा, इस सवाल पर ट्रंप ने कहा कि इसका समय इस बात पर निर्भर करेगा कि अभियान को किस तरह अंजाम दिया जाता है। उन्होंने दोहराया कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके।

‘मैं चुनाव मैदान में होता, तो हम जीत गए होते’

चुनाव प्रचार के दौरान अपनी रैलियों को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने किसी तरह का अफसोस जताने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अगर उनका नाम भी चुनावी मतपत्र पर होता तो नतीजे अलग होते। ट्रंप ने कहा, ”अगर मैं चुनाव मैदान में होता तो हम जीत गए होते।” उन्होंने अपनी रैलियों में उमड़ने वाली भारी भीड़ का हवाला देते हुए कहा कि उनके प्रति लोगों का उत्साह रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में वोट में तब्दील नहीं हो सका। उन्होंने कहा, ”हम उम्मीदवारों तक अपने प्रति लोगों का प्यार पहुंचाने में सफल नहीं रहे।”

चुनाव के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ काम करने की संभावनाओं पर ट्रंप ने कहा कि वह उनके साथ काम कर सकते हैं, बशर्ते वे ऐसा कोई कदम न उठाएं जिसे वह देश के लिए नुकसानदेह मानते हों। उन्होंने बताया कि डेमोक्रेटिक नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के लिए संपर्क किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उनके पास विरोध वाले विधेयकों को वीटो करने का अधिकार है।

संभावित महाभियोग की कार्रवाई को लेकर पूछे जाने पर भी ट्रंप ने चिंता नहीं जताई। उन्होंने कहा कि बिना ठोस आधार के महाभियोग की कोशिश डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए ही नुकसानदेह साबित होगी। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इनमें प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों और स्थानीय निकायों के पदों पर भी चुनाव कराए जाते हैं।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें