इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी पलटवार शुरू कर दिया। ‘ऑपरेशन फतह-ए-खैबर’ नाम से ईरान ने एकसाथ 7 देशों पर हमला किया है। जिन देशों पर ईरान ने हमला किया है, उनमें इजराइल, यूएई, सऊदी, कुवैत, जॉर्डन, कतर और बहरीन का नाम शामिल है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे को भी निशाना बनाया गया।
ईरान ने पहले ही अमेरिका को “विनाशकारी जवाब” देने की चेतावनी दी थी। अब की गई इस जवाबी कार्रवाई में सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका को होने का दावा किया जा रहा है, क्योंकि ईरान ने उसके छह ठिकानों पर एक साथ मिसाइलें दागीं।
ईरान ने सबसे पहले Israel के शहर Tel Aviv पर मिसाइल हमला किया। मिसाइलों की लगातार बौछार के बाद पूरे देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। Bahrain में स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। सामने आई तस्वीरों में बेस को भारी नुकसान होने का दावा किया जा रहा है।
United Arab Emirates की राजधानी Abu Dhabi में मौजूद अमेरिकी बेस को निशाना बनाया गया। हमले के बाद पूरे देश में अलर्ट जारी कर दिया गया है। Qatar की राजधानी Doha में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल अटैक किया गया। कतर के रक्षा मंत्री के अनुसार, हमले के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों और बंकरों में जाने की सलाह दी गई। Saudi Arabia की राजधानी Riyadh में अमेरिकी बेस को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागी गईं। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
Jordan में मौजूद अमेरिकी मुख्यालय पर भी हमला किया गया। जॉर्डन, इजराइल का पड़ोसी देश है और वहां अमेरिका ने आधुनिक एफ-22 लड़ाकू विमान तैनात कर रखे हैं। Kuwait में स्थित अमेरिकी बेस को भी मिसाइलों से निशाना बनाया गया। इस हमले के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है।
पहले के अपडेट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हवाई हमला किया। बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन में अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक एफ-22 रैप्टर फाइटर जेट भी शामिल थे। हमले के दौरान तेहरान समेत करीब 30 ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया।
हमले के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। इस कार्रवाई के तुरंत बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को कभी परमाणु शक्ति नहीं बनने देगा। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव ठुकरा दिए थे और हमला “आखिरी विकल्प” के तौर पर किया गया। उन्होंने इसे “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” नाम दिया और दावा किया कि फोर्दो और इस्फहान जैसे अहम ठिकानों पर भी हमले किए गए।
इस संघर्ष के बढ़ने से पूरे मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। खबरों के अनुसार, यमन और लेबनान से हिजबुल्लाह जैसे समूह भी ईरान के समर्थन में सक्रिय हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव और बढ़ता है, तो इससे पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की स्थिति बन सकती है और वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति और सुरक्षा हालात पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल सभी देशों की नजर इस बात पर है कि आगे कूटनीतिक समाधान निकलता है या हालात और गंभीर होते हैं।