मध्य पूर्व में हाल के दिनों में तनाव अचानक बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। कई देशों के सैन्य ठिकाने और रणनीतिक इलाके इस संघर्ष की चपेट में आ चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
युद्ध की शुरुआत कैसे हुई?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर अचानक हवाई हमले किए। इस सैन्य अभियान को इजरायल ने “Operation Lion’s Roar” नाम दिया। इन हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल सिस्टम और नेतृत्व से जुड़े स्थानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई भी मारे गए। और यही घटना इस बड़े युद्ध की शुरुआत मानी गई।
ईरान ने कैसे दिया जवाब?
हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
इन हमलों का असर केवल इजरायल तक सीमित नहीं रहा। कई रिपोर्टों के अनुसार कुवैत, कतर, बहरीन, यूएई, सऊदी अरब और इराक जैसे देशों के आसपास भी हमलों और अलर्ट की स्थिति बनी। इस दौरान कुछ अमेरिकी सैनिकों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबरें भी सामने आई।
कितनी तबाही हुई?
अब तक के आंकड़ों के अनुसार इस संघर्ष में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।
ईरान में 1000 से ज्यादा लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
अमेरिका और इजरायल ने ईरान के अंदर हजारों सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
कई शहरों और सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है।
हालांकि युद्ध के दौरान सटीक आंकड़े लगातार बदलते रहते हैं।
तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
युद्ध का असर
ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी चेतावनी दी है। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल का गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद होता है तो वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
क्या युद्ध और फैल सकता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस संघर्ष के और फैलने का खतरा अभी भी बना हुआ है।
ईरान के सहयोगी समूह क्षेत्र के कई देशों में सक्रिय हैं
अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने मध्य पूर्व में मौजूद हैं
इजरायल लगातार हमले जारी रखने की बात कह चुका है
ऐसे में यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है या नए देशों को भी इसमें खींच सकता है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच शुरू हुआ यह संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला संकट बन चुका है। हालांकि कई देश इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी कर रहे हैं लेकिन फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
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