इंटरनेशनल डेस्क : ईरान और इजरायल की लड़ाई में अमेरिका ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई थी। अमेरिका ने ईरान के 3 प्रमुख परमाणु ठिकानों पर बस्टर बमों से हमला किया था। इसके विरोध में ईरान ने कतर में मौजूद यूएस के मिलिट्री बेस पर जोरदार हमला किया था। हालांकि यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि इस हमले से अमेरिका को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, यह हमला बेहद कमजोर था।
मिडिल ईस्ट इलाके में अमेरिका ने कई देशों में अपने सैन्य अड्डे बना रखे हैं। विस्तार से इन अड्डों के बारे में जानते हैं। कतर के दोहा में अमेरिका का मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा एयरबेस है, जिसका नाम अल उदीद है। इस में लगभग 10 हजार अमेरिकी सैनिक रहते हैं, जो लगभग 24 हेक्टेयर में फैला है।
इस बेस पर यूएस एयरफोर्स और CENTCOM की फॉरवर्ड कमान समेत कई स्पेशल फोर्सेज तैनात हैं। यहां पर लगभग 2500 अमेरिकी फौजी तैनात हैं। सीरिया में आईएसआईएस की मौजूदगी को अमेरिका खतरा मानता है। यहां पर अमेरिका का अल तनफ एयरबेस बनाया गया है। यह बेस जॉर्डन-इराक बॉर्डर पर है।
कुवैत कैंप आरिफ जान और अली अल सलेम नाम के दो अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। ये इलाका इराकी बॉर्डर से लगभग 20 मील की दूरी पर है। कैंप आरिफ जान US आर्मी सेंट्रल का फॉरवर्ड हेडक्वार्टर भी है। इसके बाद बात करते हैं संयुक्त अरब अमीरात की, जहां अमेरिका ने अल धफरा एयर बेस बनाया है।
यहां फाइटर जेट्स को तैनात किया गया है। सऊदी अरब में भी प्रिंस सुलतान नाम के सैन्य अड्डे को अमेरिका ने बना रखा है। इसी बेस पर 378वें एयर एक्सपेडिशनरी विंग की मेजबानी की जाती है। इस बेस पर लगभग 2300 सैन्य कर्मी तैनात हैं।
सीजफायर को लेकर ईरान का बड़ा बयान सामने आया है। ईरान का कहना है कि युद्ध विराम आदि को लेकर अभी कोई समझौता नहीं हुआ है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उन लोगों की जंग जारी रखने में कोई दिलचस्पी नहीं है।
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