इंटरनेशनल डेस्क : ईरान और इजरायल की लड़ाई में अब अमेरिका की एंट्री हो चुकी है। इसके बाद स्थिति और बिगड़ने के आसार हैं। अमेरिका ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों पर हमला किया है। अब सैन्य संघर्ष बढ़ने के बाद ईरान ने धमकी दी है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर देगा। यह इलाका ईरान के उत्तर और ओमान व संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दक्षिण में पड़ता है।
बता दें कि इसी रास्ते से ईरान, सऊदी अरब, कुवैत, इराक और यूएई से तेल का निर्यात होता है। इसके अलावा कतर से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) शिपमेंट भी आवागमन के लिए इसी इलाके का इस्तेमाल करते हैं। अगर इस रास्ते को ईरान बंद कर देगा तो चीन तक इसका असर दिखेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ही दुनिया का 5 फीसदी तेल सप्लाई किया जाता है। भारत भी अपने हिस्से का 40 फीसदी तेल और 50 फीसदी गैस इसी रास्ते से मंगवाता है।
बढ़ सकते हैं तेल के दाम
सूत्रों के मुताबिक अब अपने परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद ईरान इस रास्ते को बंद करने जैसा बड़ा फैसला ले सकता है। ईरान के कट्टरपंथी भी यही चाहते हैं। ईरानी मीडिया में चर्चा है कि अगर यह रास्ता बंद हुआ तो तेल के दाम 400 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान शायद ही ऐसा करे। क्योंकि रास्ता बंद करने से उसे भी आर्थिक नुकसान होगा।
चीन ईरान से बहुत ज्यादा मात्रा में तेल खरीदता है। इस रास्ते से चीन को लगभग 47 फीसदी तेल की आपूर्ति होती है, ऐसे में ड्रैगन पर असर पड़ सकता है। ईरान का लगभग 96 फीसदी तेल खरग द्वीप के जरिए निर्यात होता है। ऐसे में रास्ता बंद होने से उसे भी नुकसान होना तय है।
भारत के पास हैं ये विकल्प
सऊदी अरब और यूएई ने इजरायल के हमलों की निंदा की है। ईरान लगातार दोनों देशों से संबंध सुधार रहा है। दोनों देशों का तेल मोमुर्ज के जरिए ही निर्यात होता है। ऐसे में ईरान रास्ता बंद कर दोनों सहयोगियों को नाराज करने की भूल शायद ही करे।
रास्ता बंद होने का ज्यादा असर भारत पर नहीं दिखेगा। भारत रूस के जरिए अपने तेल की आपूर्ति कर सकता है। इससे कीमतों पर भी ज्यादा असर नहीं दिखेगा। इसके अलावा नाइजीरिया, अंगोला, ब्राजील और अमेरिका भी विकल्प हैं।

