
Iran Speaker Ghalibaf: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित कूटनीतिक वार्ताओं के बीच ईरान का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचा है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबाफ कर रहे हैं। इस दौरे को क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। ईरानी मीडिया के अनुसार इस प्रतिनिधिमंडल में सुरक्षा, सैन्य, राजनीतिक, आर्थिक और कानूनी मामलों के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब अमेरिका के साथ संभावित वार्ताओं को लेकर माहौल बन रहा है, हालांकि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास अब भी गहरा बना हुआ है।
भावुक कर देने वाली तस्वीर ने छुआ दिल
इस बीच ग़ालिबाफ द्वारा साझा की गई एक तस्वीर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा की है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक विमान के अंदर की तस्वीर पोस्ट की, जिसमें सीटों पर उन बच्चों की तस्वीरें, स्कूल बैग और जूते रखे गए थे, जो हालिया सैन्य हमलों में मारे गए थे।
همراهان من در این پرواز#Minab168 pic.twitter.com/xvXmDlSDiF
— محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) April 10, 2026
बताया जा रहा है कि यह हमला 28 फरवरी को हुआ था, जिसमें मीनाब शहर के एक स्कूल को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 160 से अधिक बच्चों की मौत हुई थी, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया।
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तस्वीर में हर सीट पर फूल रखा गया है और कुछ बैग व जूतों पर खून के निशान भी दिखाई दे रहे हैं। ग़ालिबाफ इन तस्वीरों के बीच खामोशी से खड़े नजर आते हैं। उन्होंने इस पोस्ट के साथ लिखा, “मेरे इस सफर के साथी।” यह दृश्य उस त्रासदी की गहराई को बयां करता है, जिसे ईरान लंबे समय तक नहीं भूल पाएगा।
अमेरिका पर अविश्वास, लेकिन बातचीत के लिए तैयार
इस्लामाबाद में अपने संबोधन के दौरान ग़ालिबाफ ने कहा कि ईरान बातचीत में ईमानदारी से भाग लेने के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका पर भरोसा करना अभी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले अनुभव संतोषजनक नहीं रहे हैं, इसलिए तेहरान सतर्कता बरत रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वार्ता प्रक्रिया के बीच ही एक वर्ष के भीतर ईरान पर दो बार सैन्य कार्रवाई की गई, जिससे भरोसे की कमी और बढ़ गई है।
शर्तों के साथ ही आगे बढ़ेगी वार्ता
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने साफ कर दिया है कि औपचारिक वार्ता तभी शुरू होगी जब अमेरिका उसकी पूर्व शर्तों को स्वीकार करेगा। तेहरान का मानना है कि पहले किए गए वादों को पूरा करना जरूरी है, तभी किसी नए समझौते या संघर्ष विराम की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
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वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी से बढ़ा महत्व
इस प्रतिनिधिमंडल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी अली अकबर अहमदीन भी शामिल हैं। इन नेताओं की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि यह दौरा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
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