
इंटरनेशनल डेस्क : मुस्लिम बहुल देश कजाखस्तान में अब चेहरा ढकने पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। पीएम कासिम जोमार्ट तोकायेव ने अब अपने देश में चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस कानून को उन्होंने मंजूरी दे दी है। मुस्लिम देशों में हिजाब का प्रचलन आम है। इसलिए यह बात अहम हो जाती है। कजाखस्तान सरकार के फैसले की चर्चा अब दुनियाभर में हो रही है।
फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक हिजाब की वजह से काम नहीं करती। देश के कई हिस्सों में यह तकनीक जरूरी है। अब सिर्फ बीमारी, खेल-कूद या मौसम खराब होने की स्थिति में ही चेहरा ढक सकेंगे। कजाखस्तान में लंबे समय से मांग हो रही है कि पारंपरिक संस्कृति का पालन किया जाए।
BREAKING: Kazakhstan (with 70% Muslim population) has officially banned BURQAS & NIQABS in public, calling face coverings a “threat to national security.”
President Tokayev: “Better to wear national dress than black robes.”
If Muslim Countries can do it, What is stopping us? pic.twitter.com/B55jRpKuz2
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) July 1, 2025
कजाखस्तान लंबे समय तक सोवियत यूनियन का हिस्सा रहा है। यहां मुस्लिम आबादी अधिक है, जिसके ऊपर सोवियत मूल्यों का असर अधिक दिखाई देता है। पीएम कासिम जोमार्ट तोकायेव ने कहा कि लोगों को अपनी संस्कृति और परिधानों को लेकर आगे बढ़ना चाहिए। हमें कजाख शैली के कपड़े पहनने पर जोर देना होगा। सरकार के फैसले के खिलाफ एक वर्ग ने आवाज उठानी शुरू कर दी है।
इस वर्ग का मानना है कि लोगों को अपनी पसंद के कपड़े पहनने की छूट होनी जरूरी है। इससे पहले भी 2023 में इसको लेकर विवाद हो चुका है। देश के एक इलाके में लगभग 150 छात्राओं ने पहले स्कूल आने से इनकार कर दिया था। इन छात्राओं का मानना था कि हिजाब से बैन हटना चाहिए।
कई इलाकों में विरोध के सुर उठ चुके हैं, इसके बाद भी सरकार अपनी राय को लेकर अडिग नजर आ रही है। सरकार चाह रही है कि लोग अपनी राष्ट्रीय पहचान को बनाकर रखें। प्रधानमंत्री ताकायेव का मानना है कि मजहब लोगों का निजी मामला है, लेकिन हमारी राष्ट्रीय पहचान को लेकर हमें अपनी ड्रेसिंग का भी ध्यान रखना चाहिए।
आपको बता दें कि उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान में भी हिजाब पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। खास बात ये है कि सभी देश सोवियत यूनियन का हिस्सा रहे हैं।
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