इंटरनेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। खासतौर पर इजरायल और लेबनान के बीच हालात अभी भी काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसी बीच एक सकारात्मक पहल देखने को मिली है। इजरायल ने वाशिंगटन में अपने राजनयिकों के जरिए लेबनान के साथ सीधे फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। बयान के मुताबिक, इस बातचीत में मध्यस्थता अमेरिका ने की थी। इस दौरान लेबनान में तैनात अमेरिकी राजदूत भी इस चर्चा का हिस्सा रहे।
पहली बार आमने-सामने बैठक की तैयारी
ध्यान देने वाली बात यह है कि इजरायल और लेबनान के बीच लंबे समय से कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं रहे हैं। ऐसे में यह बातचीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फोन पर बातचीत के बाद दोनों देशों ने अगला कदम उठाते हुए 14 अप्रैल को वाशिंगटन में आमने-सामने बैठक करने का फैसला किया है। यह बैठक अमेरिकी विदेश विभाग में आयोजित की जाएगी, जहां सीजफायर और आगे के हालात पर विस्तार से चर्चा होगी।
अमेरिका के सीजफायर प्लान का हिस्सा
यह पूरी प्रक्रिया अमेरिका की उस योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद क्षेत्र में जारी तनाव को कम करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक से दोनों देशों के बीच सीमा पर बढ़ते टकराव को कम करने में मदद मिल सकती है।
लेबनान पर इजरायल के हमले जारी
हालांकि, दूसरी ओर जमीनी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। लेबनान के अधिकारियों के अनुसार, इजरायल लगातार हमले कर रहा है। इन हमलों में अब तक करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6,300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बुधवार को सीजफायर की घोषणा के बाद भी इजरायल ने लेबनान में बमबारी की, जिसमें कम से कम 357 लोगों की जान चली गई।
सीजफायर को लेकर विवाद
इजरायल का कहना है कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता। वहीं ईरान का दावा है कि लेबनान भी इस समझौते का हिस्सा है। इसी मुद्दे को लेकर ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे, तो इससे शांति वार्ता पर असर पड़ सकता है और पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। अब सभी की नजर 14 अप्रैल को वाशिंगटन में होने वाली बैठक पर टिकी है। यह बैठक तय करेगी कि क्या दोनों देश अपने मतभेद कम कर पाएंगे या क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ेगा।