
इंटरनेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और ज्यादा गंभीर हो गया है। हाल ही में इजरायल ने ईरान के कई अहम ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिससे क्षेत्र में बड़े टकराव का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने ईरान के दो प्रमुख परमाणु केंद्रों और दो बड़े स्टील प्लांट्स को निशाना बनाया। इजरायल का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करना और उसकी आर्थिक ताकत को नुकसान पहुंचाना था। हालांकि, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने दावा किया है कि इन हमलों से कोई रेडियोएक्टिव रिसाव नहीं हुआ और नुकसान भी सीमित रहा है।
ईरान का कड़ा विरोध
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इस हमले की तीखी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इजरायल ने ईरान के स्टील कारखानों, एक पावर प्लांट और नागरिक परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया है। इजरायल को इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। यह हमला कूटनीतिक प्रयासों की समयसीमा का उल्लंघन है।
किन-किन जगहों को बनाया गया निशाना
इजरायली सेना के मुताबिक, हमले में जिन प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें अराक में स्थित ‘शाहिद खोंडाब’ हेवी वाटर कॉम्प्लेक्स, याज्द के अर्दकन में येलोकेक उत्पादन संयंत्र, दक्षिण-पश्चिम ईरान का ‘खुज़ेस्तान स्टील’ प्लांट और मध्य ईरान का ‘मुबारकेह स्टील’ प्लांट शामिल हैं। इन ठिकानों को ईरान के परमाणु और औद्योगिक ढांचे के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
बढ़ा जवाबी कार्रवाई का खतरा
हमलों के बाद ईरान की सेना की प्रमुख इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने चेतावनी दी है कि वह अमेरिका और इजरायल से जुड़े ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकती है। IRGC ने खाड़ी देशों में काम कर रहे लोगों को भी सतर्क रहने को कहा है, खासकर उन इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है जहां अमेरिकी हित जुड़े हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर
ईरान ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर सख्ती बढ़ा सकता है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।
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