इंटरनेशनल डेस्क: मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने ईरान पर एक बड़े हवाई हमले के दौरान ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों को मार गिराया है। इस हमले को लेकर IDF ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान के बढ़ते परमाणु खतरे के जवाब में की गई है।
IDF की ओर से सोशल मीडिया पर जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “हम पुष्टि करते हैं कि ईरान की सशस्त्र सेनाओं के चीफ ऑफ स्टाफ, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर और आपातकालीन कमान के प्रमुख को 200 से अधिक लड़ाकू विमानों द्वारा अंजाम दिए गए व्यापक हवाई हमलों में निशाना बनाया गया और वे मारे गए हैं।”
-परमाणु हथियारों की दौड़ बना मुख्य कारण
IDF का कहना है कि उन्हें हाल ही में मिली खुफिया रिपोर्टों से संकेत मिला कि ईरान अब उस परमाणु बिंदु के बेहद करीब पहुंच चुका है जहां से लौटना संभव नहीं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान भूमिगत और सुदृढ़ यूरेनियम संवर्धन केंद्रों में हजारों किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम का उत्पादन कर रहा है।
इजरायल ने इसे अपने राष्ट्रीय अस्तित्व पर खतरा बताते हुए प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक (पूर्व-खतरों को रोकने के लिए हमला) को जायज ठहराया है। रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज़ ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह “अनिवार्य और रणनीतिक कदम था, जिसे उठाना ज़रूरी था।”
-ईरान की जवाबी कार्रवाई
ईरानी पक्ष ने भी चुप्पी नहीं साधी। IDF के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफ़ी डेफ्रिन के अनुसार, ईरान ने बीते कुछ घंटों में 100 से अधिक ड्रोन इजरायल की ओर भेजे हैं। उन्होंने बताया कि इजरायली वायु रक्षा प्रणाली लगातार सक्रिय है और अधिकतर ड्रोन को रास्ते में ही गिरा दिया गया है।
-नेतन्याहू का कड़ा संदेश
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस अभियान को “एक आवश्यक सैन्य प्रतिक्रिया” करार देते हुए कहा कि यह ऑपरेशन ईरानी परमाणु खतरे को बेअसर करने के लिए किया गया। उन्होंने जोर दिया कि इजरायल “अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने को तैयार है।”
-अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का इंतजार
इस ताजा संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया पर टिकी है। आने वाले दिनों में इस तनाव के वैश्विक राजनीति और तेल बाजारों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।