इंटरनेशनल डेस्क: मध्य-पूर्व में लंबे समय से जारी गाजा संघर्ष के समाधान की दिशा में एक अहम मोड़ सामने आया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने पुष्टि की है कि कतर की राजधानी दोहा में चल रही वार्ताओं में इजरायली प्रतिनिधिमंडल एक व्यापक समझौते पर विचार कर रहा है, जो न केवल अस्थायी युद्धविराम बल्कि संघर्ष के पूर्ण अंत की संभावना को भी शामिल करता है।
-नेतन्याहू कार्यालय ने दी जानकारी
रविवार को जारी बयान में कहा गया कि दोहा में इजरायली वार्ताकार हर विकल्प की समीक्षा कर रहे हैं, जिनमें अमेरिका द्वारा प्रस्तावित “विटकॉफ रूपरेखा” भी शामिल है। यह रूपरेखा एक चरणबद्ध योजना है, जिसमें पहले अस्थायी युद्धविराम और बंधकों की रिहाई, और फिर हमास के आतंकियों का निष्कासन तथा गाजा पट्टी का निरस्त्रीकरण शामिल है।
-“सैन्य और कूटनीतिक दबाव”
सरकारी बयान में इस बदलाव का श्रेय नेतन्याहू की “सैन्य और कूटनीतिक दबाव” की रणनीति को दिया गया, जिसके तहत अब तक 197 बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की जा चुकी है। फिलहाल 58 बंधक अब भी हमास के कब्जे में हैं, जिनमें से 36 के मारे जाने की आशंका है।
हालांकि, इस संभावित समझौते पर इजरायली सत्ता के गलियारों में मतभेद भी उभरकर सामने आए हैं। कट्टरपंथी विचारों के लिए पहचाने जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इटमार बेन-ग्वीर ने समझौते के विचार को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “जब तक हमास को पूरी तरह पराजित नहीं किया जाता, युद्धविराम की कोई बात नहीं हो सकती।” वहीं, रक्षा मंत्री इज़राइल कैट्ज़ ने जानकारी दी कि एक हालिया हवाई हमले में हमास के शीर्ष कमांडर मोहम्मद सिनवार के मारे जाने की संभावना है।
-युद्धविराम और बंधकों की रिहाई
मोहम्मद सिनवार, जो हमास के दिवंगत नेता याह्या सिनवार के भाई थे, युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के खिलाफ माने जाते थे। उनकी मौत को एक बड़ी सामरिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जो संभावित समझौते को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिनवार खान यूनिस में एक सुरंग में हुए हवाई हमले में मारे गए, हालांकि इजरायली सेना ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर भीषण हमला कर 1,180 लोगों की जान ली और 252 लोगों को बंधक बना लिया था। यह संघर्ष अब तक हजारों जानें ले चुका है और लाखों लोगों को विस्थापन की पीड़ा झेलनी पड़ी है। अब जबकि दोहा में चल रही वार्ता संभावित समाधान की ओर संकेत कर रही है, यह देखना बाकी है कि क्या इजरायल और हमास के बीच वर्षों से चला आ रहा यह संघर्ष किसी ठोस और स्थायी शांति की ओर बढ़ पाएगा या नहीं।