इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और इजरायल के बीच अब फिलहाल सीजफायर हो चुका है। ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने अब बुधवार (16 जुलाई) को एक ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इसमें भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे ईरान की गैरजरूरी यात्रा से परहेज करें। इस एडवाइजरी के पीछे इलाके में पिछले कई दिनों से बढ़ रहीं सुरक्षा चिंताओं को वजह बताया गया है। भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर किया है। इसमें सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों का हवाला दिया गया है।
पोस्ट में लिखा गया है कि भारतीय लोग ईरान की यात्रा से पहले मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखें। भारतीय नागरिक दूतावास और संबंधित अधिकारियों की ओर से जारी हिदायतों का पालन करना सुनिश्चित करें। वर्तमान में कई भारतीय नागरिक ऐसे हैं, जो ईरान में हैं। अगर वे लौटना चाह रहे हैं तो उनके पास कई ऑप्शन मौजूद हैं। वहां से आने के इच्छुक लोग कमर्शियल उड़ान या नौका सेवा के विकल्पों को चुन सकते हैं।
— India in Iran (@India_in_Iran) July 15, 2025
ईरान और आसपास के देशों के बीच फिलहाल तनाव का माहौल है। 13 जून को इजरायल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ शुरू किया था। इसके बाद इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के सैन्य और कई परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था। ईरान ने भी मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए जवाबी कार्रवाई की थी। इजरायल और ईरान के बीच लगभग 12 दिन तक युद्ध चला था। इसके बाद दोनों के बीच सीजफायर हुआ। अमेरिका ने भी इजरायल के पक्ष में ईरान पर बमबारी की थी।
22 जून को यूएस ने नतांज, फोर्डो और इस्फहान में प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला किया था। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी हमले किए थे। यूएस के प्रमुख ठिकानों और कतर में अमेरिकी बेस पर बमबारी की गई थी। 24 जून को दोनों देशों के बीच हमला रुक गया था। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने हमला रोकने का ऐलान किया था।
वाशिंगटन ने कहा था कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम एटम बम बना सकता है। वहीं, ईरान इसको लेकर लगातार खंडन करता रहा है। ईरान के अनुसार उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ और सिर्फ नागरिक उद्देश्यों के लिए ही है। जुलाई 2015 में यूएस और ईरान के बीच एक परमाणु समझौता हुआ था। इसे संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के तौर पर भी जाना जाता है।
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