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जापान को सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनने का कोई अधिकार नहीं है

November 19, 2025

जापान को सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनने का कोई अधिकार नहीं है

यूएन स्थित स्थाई चीनी प्रतिनिधि फू छोंग ने 18 नवंबर को सुरक्षा परिषद के सुधार पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण सत्र में भाषण दिया। इस मौके पर फू छोंग ने कहा कि जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची साने ने हाल में कांग्रेस में थाईवान के बारे में उकसावे भरी टिप्पणी की। ताकाइची साने ने कहा कि अगर थाईवान में संकट हो, तो जापान के लिए “अस्तित्व का संकट” पैदा होगा। इससे संकेत दिया गया है कि जापान तथाकथित “सामूहिक आत्मरक्षा अधिकार” के अनुसार थाईवान जलडमरूमध्य के मुद्दे में सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है।

फू छोंग ने कहा कि सभी जानते है कि दुनिया में सिर्फ एक चीन है। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र कानूनी सरकार है। थाईवान चीन की प्रादेशिक भूमि का एक अभिन्न भाग है। फू छोंग ने कहा कि थाईवान के बारे में ताकाइची साने की बात बेहद गलत और खतरनाक है। यह चीन के अंदरूनी मामलों में धृष्ठतापूर्वक हस्तक्षेप है और एक चीन की नीति व चीन-जापान चार राजनीतिक दस्तावेजों की भावना का गंभीर उल्लंघन है।

यह अंतर्राष्ट्रीय न्याय के विरुद्ध उकसावा है, युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का नुकसान है और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों का पैरों तले रौंद भी है। ऐसे देश को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनने की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है। चीनी स्थाई प्रतिनिधि फू छोंग द्वारा भाषण दिए जाने के अगले ही दिन, यानी 19 नवंबर को चीन की राजधानी पेइचिंग में आयोजित एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए चीन के इस आधिकारिक रुख़ की पुष्टि की और इसके पीछे के कारणों को विस्तार से रखा।

प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत, अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना सुरक्षा परिषद की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है। इतिहास इस बात का गवाह है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने आक्रामक युद्ध छेड़ा था, जिसके कारण एशिया और पूरी दुनिया के लोगों को भारी पीड़ा और विनाश का सामना करना पड़ा था।  चीन का मानना है कि आज भी जापान ने अपने युद्ध अपराधों पर पूरी तरह से और गंभीरता से आत्ममंथन नहीं किया है। इसके विपरीत, वहां कुछ लोग अभी भी द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास के बारे में ग़लत विचारों को बढ़ावा देते हैं, विवादास्पद यासुकुनी मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं, और आक्रामकता के इतिहास को विकृत करने, नकारने या उसका महिमामंडन करने का प्रयास करते हैं।

माओ निंग ने वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने हाल ही में थाईवान के मुद्दे पर स्पष्ट रूप से ग़लत टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने इसे चीन के आंतरिक मामलों में घोर हस्तक्षेप क़रार दिया और कहा कि जापान ने अंतर्राष्ट्रीय क़ानून और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों को रौंदा है, साथ ही युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती दी है। चीन का स्पष्ट मत है कि ऐसा देश अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में असमर्थ है, और इसलिए वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने के कतई योग्य नहीं है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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