Last Updated: October 1, 2026

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तीन दिवसीय दौरे पर आज भारत आएंगी जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची साने, पीएम मोदी से होगी अहम बातचीत

July 1, 2026

तीन दिवसीय दौरे पर आज भारत आएंगी जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची साने, पीएम मोदी से होगी अहम बातचीत

इंटरनेशनल डेस्क: जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची साने 1 जुलाई से 3 जुलाई तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगी। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। इस दौरे को भारत और जापान के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

दिल्ली पहुंचने पर होगा औपचारिक स्वागत

प्रधानमंत्री ताकाइची साने 1 जुलाई की शाम नई दिल्ली पहुंचेंगी। उनके सम्मान में राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी, जिसमें दोनों देशों के संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा जापानी प्रधानमंत्री भारत-जापान व्यापार मंच के कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी और दोनों देशों के व्यापारिक सहयोग को बढ़ाने पर विचार करेंगी।

प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली भारत यात्रा

प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह ताकाइची साने की पहली भारत यात्रा है। हालांकि पिछले कुछ महीनों में उनकी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई बार मुलाकात और बातचीत हो चुकी है। हाल ही में फ्रांस के एविएन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने मुलाकात की थी। इससे पहले नवंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर भी दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई थी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?

विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। बैठक के दौरान दोनों देशों के नेता व्यापार, निवेश, आर्थिक सुरक्षा, रक्षा सहयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक संबंध और आपसी रणनीतिक सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही दोनों देश भविष्य की साझेदारी को लेकर नई योजनाओं पर भी विचार कर सकते हैं।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र रहेगा चर्चा का प्रमुख विषय

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री साने की बैठक में फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP) यानी मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। भारत और जापान दोनों ही क्वाड (Quad) समूह के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्ग बनाए रखने के पक्षधर हैं। भारत की एक्ट ईस्ट नीति और जापान की फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक रणनीति को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। दोनों देशों का मानना है कि दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच बेहतर संपर्क क्षेत्रीय विकास के लिए जरूरी है।

पूर्वोत्तर भारत में बढ़ रहा जापान का सहयोग

बीते कुछ वर्षों में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में जापान की भागीदारी लगातार बढ़ी है। दोनों देशों ने सड़क, कनेक्टिविटी, कौशल विकास, बुनियादी ढांचे और निवेश से जुड़े कई परियोजनाओं पर साथ मिलकर काम किया है। फरवरी 2026 में मेघालय के शिलांग में आयोजित किजुना कॉन्क्लेव के दौरान जापान के विदेश राज्य मंत्री इवाओ होरी ने कहा था कि पूर्वोत्तर भारत वह क्षेत्र है, जहां भारत की एक्ट ईस्ट नीति और जापान की हिंद-प्रशांत रणनीति एक साथ आगे बढ़ती हैं। जनवरी 2026 में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी पूर्वोत्तर भारत और पड़ोसी क्षेत्रों के बीच संपर्क बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई थी।

लगातार मजबूत हो रहे हैं दोनों देशों के रिश्ते

भारत और जापान के बीच उच्च स्तरीय संवाद लगातार जारी है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान का दौरा किया था। इसके बाद जनवरी 2026 में जापान के विदेश मंत्री भारत आए। अप्रैल 2026 में जापान में आयोजित AZEC Plus बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हिस्सा लिया, जहां ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा भारत के पेट्रोलियम मंत्री ने भी नवंबर 2025 में जापान का दौरा किया था, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी।

पूर्वोत्तर भारत के साथ बढ़ा सहयोग

भारत और जापान ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए कई साझा पहल शुरू की हैं। इनमें सड़क और परिवहन नेटवर्क, मानव संसाधन विकास, आर्थिक सहयोग, आधिकारिक विकास सहायता (ODA), सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से दोनों देशों ने कई सहयोगी मंच भी बनाए हैं, जिनमें भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम, भारत-जापान बौद्धिक सम्मेलन, मानव संसाधन सहयोग कार्यक्रम, आर्थिक साझेदारी, आधिकारिक विकास सहायता (ODA), कनेक्टिविटी परियोजनाएं और सांस्कृतिक सहयोग प्रमुख हैं।

नेताओं के बीच लगातार बढ़ा संपर्क

पिछले दो वर्षों में जापान और भारत के नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण दौरे हुए हैं। मई 2025 में जापान की प्रतिनिधि सभा के तत्कालीन अध्यक्ष फुकुशिरो नुकागा ने असम का दौरा किया और राज्य सरकार के साथ विभिन्न विकास परियोजनाओं पर चर्चा की। दिसंबर 2025 में जापान के कागावा प्रांत के उप-राज्यपाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली और मणिपुर का दौरा किया। वहीं फरवरी 2026 में विदेश राज्य मंत्री इवाओ होरी ने असम और मेघालय का दौरा कर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात की।

दूसरी ओर जनवरी 2025 में असम के मुख्यमंत्री, जुलाई 2025 में नागालैंड के मुख्यमंत्री और अक्टूबर 2025 में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी जापान की यात्रा कर चुके हैं। इन दौरों के दौरान निवेश, कौशल विकास, शिक्षा और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों और साझेदारी पर चर्चा हुई थी।

 

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