15 दिसंबर को जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने राजधानी अम्मान में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिरता और चीन-अरब सहयोग के भविष्य पर विस्तृत चर्चा हुई। राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने कहा कि वे युवावस्था से ही कई बार चीन की यात्रा कर चुके हैं और चीन के प्रति गहरी आत्मीयता रखते हैं।
उन्होंने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ अपनी मित्रता को “अनमोल और स्थायी” बताते हुए कहा कि जॉर्डन, चीन के साथ संबंधों को और व्यापक एवं सशक्त बनाना चाहता है। उन्होंने उल्लेख किया कि जॉर्डन चीन के साथ उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने, साथ ही अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों में समन्वय और संवाद को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। राजा ने कहा कि दोनों देश मिलकर मौजूदा अस्थिर अंतरराष्ट्रीय स्थिति, विशेषकर मध्य पूर्व क्षेत्र की चुनौतियों, से निपट सकते हैं।
उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि जॉर्डन अगले वर्ष चीन में आयोजित होने वाले दूसरे चीन-अरब शिखर सम्मेलन का पूर्ण समर्थन करता है और सम्मेलन की तैयारियों में सक्रिय योगदान देगा। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन अरब-चीन सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का उत्कृष्ट अवसर होगा। वांग यी ने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन में चीन-जॉर्डन संबंध लगातार स्वस्थ और स्थिर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यह वर्ष चीन और जॉर्डन के बीच रणनीतिक साझेदारी की स्थापना की 10वीं वर्षगांठ का प्रतीक है, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वांग यी ने आश्वस्त किया कि चीन दोनों देशों के बीच संचार और सहयोग को और मजबूत करेगा, प्रमुख नेताओं के बीच हुई सहमति को लागू करेगा और आने वाले दशक में साझेदारी को नए चरण में पहुँचाने के लिए कार्य करेगा। उन्होंने महामहिम राजा को दूसरे चीन-अरब शिखर सम्मेलन में भाग लेने हेतु चीन आने का हार्दिक निमंत्रण दिया।
वांग यी ने जॉर्डन की सराहना करते हुए कहा कि राजा अब्दुल्ला द्वितीय के नेतृत्व में जॉर्डन क्षेत्र में स्थिरता, न्याय और शांति का एक सकारात्मक एवं संतुलित कारक रहा है। उन्होंने कहा कि चीन एक जिम्मेदार देश होने के नाते सदैव समानता, पारस्परिक सम्मान और गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों का पालन करता है तथा यह मानता है कि प्रत्येक देश को अपनी परिस्थितियों के अनुसार विकास का मार्ग चुनने का अधिकार है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

