
नेशनल डेस्क : कानपुर मेट्रो परियोजना के चार भूमिगत स्टेशनों के निर्माण कार्य से जुड़ी एक बड़ी समस्या सामने आई है। तुर्की कंपनी गुलेरमक द्वारा शहर छोड़ने और ठेकेदारों को लंबित भुगतान न करने के कारण करीब 80 करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया है। इस घटना ने स्थानीय ठेकेदारों और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि पिछले दस महीनों से इन ठेकेदारों को उनके बकाया भुगतान का कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
तुर्की कंपनी के सभी अधिकारी भागे
आपको बता दें कि गुलेरमक सैम इंडिया नामक तुर्की कंपनी ने कानपुर मेट्रो परियोजना के चार भूमिगत स्टेशनों का निर्माण कार्य किया था, लेकिन अब इस कंपनी के सभी वरिष्ठ अधिकारी शहर छोड़कर भाग गए हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि कंपनी ने जानबूझकर भारत-पाकिस्तान युद्ध के संदर्भ में तुर्की की कथित भूमिका के कारण देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद भुगतान में देरी की। इसके चलते ठेकेदारों को पिछले दस महीनों से भुगतान नहीं मिला है।
वहीं अब इस मामले में ठेकेदारों का कहना है कि वे कई बार कंपनी से संपर्क करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने अस्पष्ट और टालमटोल भरे जवाब दिए। इसके बाद, नौ ठेकेदारों ने जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय में शिकायत दर्ज कर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की।
बकाया भुगतान की सूची
ठेकेदारों ने अपने बकाया भुगतान का विस्तृत विवरण भी साझा किया, जिसमें प्रमुख कंपनियों और उनके बकाए गए भुगतान की राशि इस प्रकार से है…
-मेट्रो मार्बल – 70 करोड़ रुपये
-रेडिएंट सर्विसेज – 20 करोड़ रुपये
-श्रेयांस इन्फ्राटेक – 70 करोड़ रुपये
-एस इंटीरियर – 80 लाख रुपये
-एमडी एहसान पेंटर – 80 लाख रुपये
-विनोद गुप्ता एंटरप्राइजेज – 54 लाख रुपये
-नंदन प्रीफैब – 50 लाख रुपये
-श्री बालाजी एंटरप्राइजेज – 50 लाख रुपये
ठेकेदारों का कहना है कि कंपनी ने उन्हें बार-बार भुगतान का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
UPMRC ने तुर्की कंपनी को लेकर दिया बयान
UPMRC (उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन) के संयुक्त महाप्रबंधक (जनसंपर्क), पंचानन मिश्रा ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि गुलेरमैक ने कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 के चार स्टेशनों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया था, और इसके लिए UPMRC ने कंपनी को पूरा भुगतान कर दिया था। उन्होंने बताया कि ये ठेकेदार गुलेरमैक के सब-कॉन्ट्रैक्टर्स हैं और अनुबंध के अनुसार मेट्रो ने 5 प्रतिशत राशि रिजर्व में रखी है, जो एक वर्ष बाद जारी की जाएगी। अगर गुलेरमैक ठेकेदारों को भुगतान नहीं करती, तो UPMRC इस राशि को ठेकेदारों को देने के लिए बाध्य होगी।
प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया
यह घटना कानपुर मेट्रो परियोजना में वित्तीय अनियमितताओं और प्रबंधन में खामियों को उजागर करती है। ठेकेदारों ने जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि उनका बकाया भुगतान वसूल किया जा सके। इस मुद्दे ने स्थानीय ठेकेदारों और श्रमिकों में असंतोष और आक्रोश को जन्म दिया है, जो अब अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है, ताकि इस मुद्दे का समाधान जल्दी किया जा सके।
कानपुर मेट्रो परियोजना में तुर्की कंपनी द्वारा की गई लापरवाही और ठेकेदारों को लंबित भुगतान ने कई सवाल उठाए हैं। यह घटना न केवल ठेकेदारों के लिए बल्कि पूरे मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए एक गंभीर मुद्दा बन सकती है। प्रशासन को इस मामले पर शीघ्र और कड़े कदम उठाने होंगे, ताकि ठेकेदारों के बकाया भुगतान की जल्द वसूली हो सके और भविष्य में ऐसी समस्याएं न आएं।