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तिब्बती लोगों से जानिए, बोर्डिंग स्कूल अच्छे हैं या नहीं…?

उन्हें तिब्बती बोर्डिंग स्कूलों की अच्छी समझ है। हाल ही में उन्होंने इस विषय पर चर्चा की।

एक विद्वान के रूप में तिब्बती बोर्डिंग स्कूलों पर उनकी तीन टिप्पणियाँ हैं:

पहला, बोर्डिंग स्कूल तिब्बत के दूरदराज के इलाकों में किसानों और चरवाहों परिवारों के बच्चों के शैक्षिक अधिकारों की यथासंभव रक्षा करते हैं। बोर्डिंग प्रणाली लागू होने के बाद, ग्रामीण छात्र और शहरी छात्र उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक संसाधनों को साझा कर सकते हैं और समान शर्तों के साथ स्कूली शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच शिक्षा का अंतर स्पष्ट रूप से कम हो गया है। यह बोर्डिंग स्कूलों की शिक्षा के कारण ही है कि देहाती क्षेत्रों में रहने वाले युवा वास्तव में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्राप्त करते हैं।

दूसरा, बोर्डिंग स्कूलों ने तिब्बत के विकास के लिए बड़ी संख्या में उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिभाओं को विकसित किया है। तिब्बत में हर साल लगभग 20 हजार युवा कॉलेज स्नातक होते हैं। वे तिब्बत के आधुनिक विकास का पुरजोर समर्थन करते हैं। बोर्डिंग स्कूलों के बिना, इतनी सारी उच्च-गुणवत्ता वाली प्रतिभाओं को विकसित करना असंभव होगा।

तीसरा, बोर्डिंग स्कूलों में जीवन और अध्ययन का छात्रों के विकास पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिये चूंकि स्कूल पौष्टिक भोजन और अधिक उचित आहार संरचना प्रदान करता है, इसलिये तिब्बती छात्रों की लंबाई और वजन में वृद्धि हुई है, और उनकी स्वास्थ्य स्थितियों में काफी सुधार हुआ है।

गौरतलब है कि अतीत में, देहाती क्षेत्रों में बच्चों को अपने विकास की अवधि के दौरान दूसरों के साथ आदान-प्रदान करने के अनुभव की कमी की वजह से दूसरों के साथ बातचीत करने में अकसर संघर्ष हुए थे। अकादमिक रूप से इसे “अपूर्ण समाजीकरण” कहा जाता है। बोर्डिंग स्कूलों में,

उन्हें अपने सहपाठियों का साथ लंबे समय तक मिलता है और उनके शिक्षकों द्वारा उन्हें सही मार्गदर्शन दिया जाता है। परिणामस्वरूप, उन्होंने धीरे-धीरे जटिल परिस्थितियों से निपटना सीख लिया और खुद की देखभाल करने की उनकी क्षमता बढ़ गई। जिसका बहुत से अभिभावकों ने सकारात्मक मूल्यांकन किया है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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