नेशनल डेस्कः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हवाई सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रपति को ले जा रहा मरीन वन (Marine One) हेलिकॉप्टर उड़ान के दौरान एक यात्री विमान के काफी करीब पहुंच गया। हालांकि किसी तरह की टक्कर नहीं हुई और राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित रहे, लेकिन इस घटना ने अमेरिकी हवाई सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले की जांच फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में इसे “सुरक्षा से जुड़ी घटना” माना गया है।
क्या हुआ था
मंगलवार दोपहर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर मरीन वन हेलिकॉप्टर व्हाइट हाउस से उड़ान भरकर जॉइंट बेस एंड्रयूज जा रहा था। इसी दौरान वाशिंगटन डीसी के ऊपर एक कमर्शियल यात्री विमान भी उड़ान भर चुका था। बताया जा रहा है कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर की उड़ान के समय आसपास की कमर्शियल उड़ानों को कुछ देर के लिए रोकना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसी वजह से दोनों विमान एक-दूसरे के काफी करीब आ गए।
उड़ान के दौरान क्या हुई चूक
सूत्रों के अनुसार, उड़ान के दौरान “लॉस ऑफ सेपरेशन” (Loss of Separation) की स्थिति बनी। इसका मतलब है कि दो विमानों के बीच जितनी न्यूनतम दूरी नियमों के अनुसार होनी चाहिए थी, उतनी दूरी नहीं रह गई। इस घटना में राष्ट्रपति का हेलिकॉप्टर और फ्लोरिडा जा रहा एक पैसेंजर जेट तय सुरक्षा सीमा से ज्यादा करीब आ गए। हालांकि दोनों विमान टकराने की स्थिति में नहीं थे और किसी भी यात्री या राष्ट्रपति की जान को तत्काल कोई खतरा नहीं था।
FAA ने क्या कहा
फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने बयान जारी कर कहा कि वह इस पूरे मामले की जांच कर रहा है।
FAA के मुताबिक, यह मरीन वन की सुरक्षा से जुड़ी एक घटना थी, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार ऐसा नहीं लगता कि दोनों विमान टकराने वाले थे या कोई गंभीर खतरा पैदा हुआ था।
व्हाइट हाउस ने क्या कहा
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित थी। उन्होंने बताया कि मरीन वन हेलिकॉप्टर दुनिया के सबसे अनुभवी और प्रशिक्षित सैन्य पायलट उड़ाते हैं। उड़ान के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी समय खतरे में नहीं थे।
कौन-सा यात्री विमान था
इस घटना में शामिल विमान एम्ब्रेयर E170 था, जिसे अमेरिकन एयरलाइंस की सहयोगी कंपनी एनवॉय एयर (Envoy Air) फ्लाइट नंबर 3742 के रूप में संचालित कर रही थी। यह विमान फ्लोरिडा के पेनसाकोला शहर जा रहा था। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट के अनुसार विमान दोपहर 2:18 बजे रीगन नेशनल एयरपोर्ट के गेट से निकला। तय समय से लगभग 34 मिनट की देरी से उड़ान भरी। दोपहर 2:34 बजे विमान हवा में था। उसी समय राष्ट्रपति ट्रंप का मरीन वन हेलिकॉप्टर दोपहर 2:33 बजे व्हाइट हाउस के पास स्थित एलिप्स क्षेत्र से उड़ान भर चुका था। इसी दौरान दोनों विमान एक-दूसरे के काफी करीब आ गए।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल की भूमिका पर सवाल
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को राष्ट्रपति की उड़ान के दौरान आसपास के हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखना था। आरोप है कि कंट्रोलर समय पर कमर्शियल उड़ानों को रोकने या उनकी दिशा बदलने में सफल नहीं रहे। इसी वजह से दोनों विमानों के बीच तय सुरक्षा दूरी नहीं रह सकी। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि यह चूक तकनीकी वजह से हुई या मानवीय गलती के कारण।
पिछले साल भी हुआ था बड़ा हादसा
यह घटना ऐसे समय हुई है जब पिछले साल जनवरी में वाशिंगटन डीसी के पास एक बड़ा हवाई हादसा हो चुका था। उस समय एक कमर्शियल एयरलाइन और सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की हवा में टक्कर हो गई थी, जिसमें 67 लोगों की मौत हुई थी। यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा और सबसे घातक हवाई हादसा माना गया था। उस दुर्घटना के बाद अमेरिकी सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करने और हवाई दूरी से जुड़े नियमों को और सख्त किया था।
क्या कहते हैं नए सुरक्षा नियम?
पिछले साल हुए हादसे के बाद FAA ने एयरपोर्ट के आसपास उड़ने वाले विमानों के लिए नए सुरक्षा नियम लागू किए। इन नियमों के अनुसार दो विमानों के बीच कम से कम 1.5 मील (करीब 2.4 किलोमीटर) की क्षैतिज (Horizontal) दूरी होना जरूरी है। साथ ही दोनों विमानों के बीच कम से कम 500 फीट की ऊर्ध्वाधर (Vertical) दूरी भी बनी रहनी चाहिए।
मंगलवार की घटना में इसी न्यूनतम दूरी के नियम का पालन नहीं हो पाया, इसलिए FAA ने जांच शुरू कर दी है।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल इस घटना में कोई दुर्घटना नहीं हुई और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पूरी तरह सुरक्षित रहे। लेकिन दो विमानों के तय सीमा से ज्यादा करीब आने की वजह से अमेरिकी विमानन सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। FAA अब यह जांच कर रहा है कि आखिर यह चूक कैसे हुई, इसके लिए कौन जिम्मेदार था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाने चाहिए।

