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मालदीव की आर्थिक मदद के लिए आगे आया भारत, 30 अरब रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा को मिली मंजूरी

India currency swap facility

India currency swap facility

नई दिल्ली: भारत ने मालदीव सरकार के 30 अरब रुपए की करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने के अनुरोध को मंजूरी दे दी है। यह फैसला भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और द्वीपीय देश के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता के तहत लिया गया है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।

भारत द्वारा यह सुविधा सार्क देशों के लिए करेंसी स्वैप व्यवस्था के ढांचे के तहत दी जा रही है। इस व्यवस्था पर अक्टूबर 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के बीच हस्ताक्षर किए गए थे।

इस सुविधा के तहत 30 अरब रुपए की पहली राशि इस साल 23 अप्रैल को मालदीव सरकार को दी गई थी। करेंसी स्वैप व्यवस्था के तहत मालदीव को भारतीय रुपए उपलब्ध होते हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर उसे नकदी की उपलब्धता और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। भारत के लिए यह निरंतर वित्तीय सहायता हिंद महासागर के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी देश के साथ व्यापक संबंधों का भी हिस्सा है।

वर्ष 2024-27 के ढांचे के तहत द्विपक्षीय करेंसी स्वैप व्यवस्था में रियायती शर्तें शामिल हैं, जिनमें अनुकूल ब्याज दरें और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। वर्ष 2012 में इस ढांचे की शुरुआत के बाद से आरबीआई मालदीव को कुल 1.1 अरब डॉलर से अधिक की स्वैप सहायता उपलब्ध करा चुका है।

भारत ने सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के माध्यम से भी मालदीव की मदद की है। भारत ने 250 मिलियन डॉलर और 100 मिलियन डॉलर के दो दीर्घकालिक ट्रेजरी बॉन्ड की खरीद की थी। इसके अलावा, भारत द्वारा खरीदे गए 150 मिलियन डॉलर मूल्य के तीन ट्रेजरी बिलों का भुगतान मालदीव ने कर दिया है। इन प्रतिभूतियों पर लगा 42.8 मिलियन डॉलर का ब्याज भारत सरकार ने चुकाया था।

करेंसी स्वैप सुविधा और मालदीव के ट्रेजरी बॉन्ड एवं बिलों में भारत के निवेश ने देश की वित्तीय स्थिरता को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह ताजा फैसला मालदीव के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के भारत के व्यापक प्रयासों के बीच आया है। बयान में कहा गया कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और उसके ‘महासागर’ विजन क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति में मालदीव का विशेष स्थान है।

भारत मालदीव के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसमें अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान अपनाई गई ‘व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए संयुक्त दृष्टिकोण’ को लागू करना भी शामिल है।

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