
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब और ज्यादा गंभीर हो गया है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने पद संभालने के बाद अपने पहले संदेश में अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने लोगों की मौत का बदला जरूर लेगा और दुश्मनों के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना जारी रखेगा।
मोजतबा खामेनेई ने यह भी कहा कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रखा जाएगा। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति गुजरती है। इसलिए उनके इस बयान का असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। हालांकि अपने इस पहले संबोधन के दौरान मोजतबा खामेनेई कैमरे पर दिखाई नहीं दिए। कुछ समय पहले इजरायल की खुफिया एजेंसी ने दावा किया था कि युद्ध की शुरुआती बमबारी में वह घायल हो गए थे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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अपने संदेश की शुरुआत अल्लाह के नाम से करते हुए खामेनेई ने कहा कि ईरान न्याय और शांति की राह पर चलता है, लेकिन अपने दुश्मनों के हमलों का जवाब देना भी उसका अधिकार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में मारे गए लोगों, खासकर बच्चों की मौत को ईरान कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने खास तौर पर मिनाब में मारे गए लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके खून का बदला लिया जाएगा और शहीदों की कुर्बानी बेकार नहीं जाने दी जाएगी।
मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी खाड़ी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहता है। लेकिन अगर उन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किया जाता है, तो उन्हें निशाना बनाना जारी रहेगा। उन्होंने साफ कहा कि मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद किया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता, तो ईरान अपनी अन्य सैन्य और क्षेत्रीय ताकतों का इस्तेमाल भी कर सकता है।
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अपने संबोधन में खामेनेई ने ईरानी सेना और सुरक्षा बलों का धन्यवाद किया और कहा कि देश की रक्षा के लिए उनके प्रयास सराहनीय हैं। साथ ही उन्होंने ईरान की जनता से अपील की कि वे देशभर में होने वाली रैलियों में बड़ी संख्या में हिस्सा लें और दुनिया को दिखाएं कि ईरान बाहरी दबाव के सामने एकजुट है। अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि यह संघर्ष सिर्फ सैन्य लड़ाई नहीं है, बल्कि यह ईरान के राष्ट्रीय सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई है। इसलिए इस लड़ाई में ईरान को अपने दुश्मनों को हराना ही होगा।