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Nepal: रातभर चली बैठक के बाद अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर सुशीला कार्की के नाम पर बनी सहमति, संसद भंग करने पर अब भी गतिरोध जारी

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Nepal: नेपाल में जारी राजनीतिक संकट के बीच पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार की अगुवाई सौंपने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की अध्यक्षता में गुरुवार देर रात से शुक्रवार तड़के तक चली मैराथन बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। इस दौरान सेनाध्यक्ष अशोकराज सिग्देल, वरिष्ठ न्यायविद्, तथा ‘जेन-जेड’ आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों की भी सक्रिय भूमिका रही।

शीतल निवास में हुआ अहम फैसला
नेपाल के राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में चली गहन बैठकों के बाद अंततः सभी पक्षों ने पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने पर सहमति जताई। यह फैसला उस वक्त आया, जब देश राजनीतिक खालीपन, जन आंदोलन और संसदीय अव्यवस्था से जूझ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कार्की की नियुक्ति एक गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष नेतृत्व के रूप में की जा रही है, ताकि देश को स्थिरता की ओर ले जाया जा सके।

संसद भंग करने की मांग पर गतिरोध बरकरार
हालांकि, शपथ से पहले ही नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ‘Gen Z’ आंदोलनकारियों ने स्पष्ट रूप से संसद भंग करने और पुराने राजनीतिक दलों की किसी भी भूमिका से बाहर रखने की मांग रखी है। इन मांगों को लेकर बैठक में काफी मंथन और विवाद हुआ, परंतु संसद भंग करने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। Gen Z नेताओं का कहना है कि जब तक संसद विघटन की औपचारिक घोषणा नहीं होती, वे अंतरिम सरकार को पूर्ण समर्थन नहीं देंगे।

हिंसक आंदोलन ने बदली देश की सियासत
पिछले 5 दिनों से जारी जन आंदोलन ने नेपाल की राजनीति की दिशा ही बदल दी है। ‘Gen Z’ बैनर तले संगठित इस आंदोलन में 34 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं। यह आंदोलन मुख्य रूप से भ्रष्टाचार, नेताओं की जवाबदेही की कमी और युवाओं की अनदेखी के खिलाफ था। भीड़ ने राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास, मंत्रालयों, होटल, दुकानों और नेताओं के घरों को निशाना बनाया। हालात इतने बिगड़े कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनके पूरे कैबिनेट को इस्तीफा देना पड़ा।

पुरानी पार्टियों को सत्ता से दूर रखने की मांग
‘Gen Z’ प्रतिनिधियों ने सेनाध्यक्ष और राष्ट्रपति से खुले तौर पर कहा है कि अंतरिम सरकार में किसी भी पुराने राजनीतिक दल या नेता को शामिल न किया जाए। उनका कहना है कि यही लोग राजनीति को भ्रष्ट और जनविरोधी बना चुके हैं। शुक्रवार सुबह तक भी इस मुद्दे पर बातचीत जारी रही, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि यह गतिरोध नहीं टूटा, तो कार्की की सरकार का गठन टल सकता है।

सुशीला कार्की: एक निडर छवि
नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश रहीं सुशीला कार्की को उनकी निष्पक्षता, ईमानदारी और निर्णय क्षमता के लिए जाना जाता है। वे न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर रही हैं। यही वजह है कि उन्हें जनता के बड़े वर्ग और सेना का समर्थन मिला।

अब आगे क्या?
–सुशीला कार्की के शपथ ग्रहण की तिथि आज तय की जा सकती है।
–संसद भंग करने पर आज दोपहर तक अंतिम फैसला संभव।
–सेना स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि कर्फ्यू में ढील दी गई है।
–‘Gen Z’ ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और उग्र होगा।

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