Last Updated: September 21, 2026

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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच नेतन्याहू का बड़ा बयान, बोले- ट्रंप पहले बातचीत चाहते हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो करेंगे सख्त कार्रवाई

July 13, 2026

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच नेतन्याहू का बड़ा बयान, बोले- ट्रंप पहले बातचीत चाहते हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो करेंगे सख्त कार्रवाई

इंटरनेशनल डेस्क: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले कूटनीतिक समाधान निकालने की कोशिश करना चाहते हैं। उनका मानना है कि अगर बातचीत से कोई ठोस नतीजा निकलता है, तो यह सबसे बेहतर रास्ता होगा। यदि ईरान अपने वादों का पालन नहीं करता, तो अमेरिका जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।

एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के जरिए परमाणु विवाद को सुलझाने की पूरी कोशिश करना चाहते हैं। ईरान पर लंबे समय से समझौतों का पालन न करने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में अगर तेहरान फिर से अपने वादों से पीछे हटता है, तो अमेरिका बल प्रयोग करने का विकल्प भी अपना सकता है।

अमेरिका-इजरायल की साझेदारी पर जताया भरोसा

नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के सहयोग की वजह से ईरान अब तक परमाणु हथियार बनाने में सफल नहीं हो पाया है। दुनिया के कई लोगों को यह अंदाजा नहीं है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम में कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा था। उनका दावा है कि हाल के संयुक्त अभियानों ने ईरान की परमाणु क्षमता को काफी नुकसान पहुंचाया है।

सैन्य अभियानों का किया जिक्र

इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में कई सैन्य अभियान चलाए, जिनका उद्देश्य ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करना था। इन अभियानों के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी पीछे धकेल दिया गया है और उसकी क्षमता पहले की तुलना में कम हुई है।

ईरान पर अमेरिकी हमलों से बढ़ा तनाव

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने रविवार को ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, लड़ाकू विमानों, ड्रोन और नौसैनिक जहाजों की मदद से लगभग 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, गोला-बारूद के भंडार, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी केंद्र जैसे सैन्य ठिकाने शामिल बताए गए हैं।

हमलों की वजह

अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज M/V GFS Galaxy पर हुए हमले के जवाब में की गई। अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि इस हमले में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) शामिल थी। दूसरी ओर IRGC ने दावा किया है कि उसने ओमान के डुक्म पोर्ट स्थित उस लॉजिस्टिक्स सपोर्ट सेंटर और रीफ्यूलिंग प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की सहायता के लिए किया जाता था।

क्षेत्र में तनाव बरकरार

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बीच पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों की ओर से उठाए जाने वाले कदम पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर असर डाल सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ेगी या हालात और ज्यादा तनावपूर्ण होंगे।

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