13 से 15 मई तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चीन यात्रा पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की करीबी नजर रही। इस दौरान चीन और अमेरिका के राष्ट्राध्यक्षों के बीच विश्व का ध्यान आकर्षित करने वाली महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों नेताओं ने “चीन और अमेरिका के बीच रचनात्मक, रणनीतिक और स्थिर संबंध” बनाने पर सहमति जताई। इसे इस यात्रा की सबसे अहम राजनीतिक सहमति माना जा रहा है। यह नई दिशा न केवल आने वाले तीन वर्षों और उससे आगे के लिए चीन-अमेरिका संबंधों को रणनीतिक मार्गदर्शन देगी, बल्कि दुनिया को बहुत जरूरी स्थिरता और निश्चितता भी प्रदान करेगी। कई विश्लेषकों ने इसे ऐतिहासिक बैठक बताया है।
पिछले वर्ष अक्टूबर में बुसान में हुई बैठक के बाद यह चीनी और अमेरिकी राष्ट्राध्यक्षों की दूसरी आमने-सामने की मुलाकात थी। साथ ही, नौ वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा भी रही। इसने दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक संबंधों को और मजबूत किया। इस बैठक में औपचारिक वार्ता और स्वागत भोज के अलावा सीमित दायरे में चर्चा और विभिन्न दौरों का भी आयोजन किया गया। दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने लगभग नौ घंटे तक बातचीत की। इससे आपसी समझ बढ़ी, विश्वास मजबूत हुआ और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। राष्ट्रपति ट्रंप के निमंत्रण पर राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस शरद ऋतु में अमेरिका की राजकीय यात्रा करेंगे। इससे यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्राध्यक्ष स्तर की कूटनीति चीन-अमेरिका संबंधों की मजबूत आधारशिला बनी हुई है।
वर्तमान समय में दुनिया तेज बदलावों से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय स्थिति लगातार अस्थिर होती जा रही है और विश्व एक नए मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। कई उतार-चढ़ावों के बावजूद चीन-अमेरिका संबंध अब अपेक्षाकृत स्थिरता की ओर बढ़ रहे हैं। दोनों बड़ी शक्तियां साथ मिलकर सह-अस्तित्व का सही रास्ता खोजने की कोशिश कर रही हैं। दुनिया को भी उम्मीद है कि ये दोनों देश अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए मानवता के सामने मौजूद साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करेंगे।
14 मई को राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बैठक के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने इतिहास, विश्व और जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। इससे चीन-अमेरिका संबंधों और मानवता के भविष्य को लेकर उनकी गंभीर सोच और जिम्मेदारी की भावना सामने आई। दोनों नेताओं ने “रचनात्मक, रणनीतिक और स्थिर संबंध” को द्विपक्षीय संबंधों की नई दिशा बनाने पर सहमति जताई। इस फैसले का दोनों देशों की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने स्वागत किया।
हालांकि यह नई दिशा केवल एक नारा बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे ठोस प्रयासों में बदलना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों देश एक-दूसरे के मूल हितों और प्रमुख चिंताओं का सम्मान करें। थाईवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे संवेदनशील विषय माना जाता है, क्योंकि यह दोनों देशों के संबंधों की राजनीतिक नींव से जुड़ा हुआ है। बैठक के दौरान राष्ट्रपति शी ने जोर देकर कहा कि थाईवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखना चीन और अमेरिका का साझा हित है, और अमेरिका को इस मुद्दे को बेहद सावधानी से संभालना चाहिए। चीन का मानना है कि अमेरिका उसकी चिंताओं को समझता है और थाईवान की स्वतंत्रता के रास्ते का समर्थन नहीं करता।
इस बैठक में चीन ने अमेरिका के साथ आपसी लाभ वाले सहयोग को और मजबूत करने का स्वागत किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने साथ आए अमेरिकी व्यापारिक प्रतिनिधियों को भी चीन के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में दोनों देश सहयोग के नए क्षेत्रों का विस्तार करेंगे, मतभेदों को कम करेंगे और आर्थिक व व्यापारिक साझेदारी को और आगे बढ़ाएंगे। इससे दोनों देशों को नए विकास के अवसर मिल सकते हैं।
चीन-अमेरिका संबंध आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में गिने जाते हैं। ये केवल दोनों देशों के 1.7 अरब लोगों के हितों से नहीं जुड़े हैं, बल्कि दुनिया की 8 अरब से अधिक आबादी पर भी प्रभाव डालते हैं। मध्य पूर्व की स्थिति, यूक्रेन संकट और कोरियाई प्रायद्वीप जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श से लेकर एपेक नेताओं की अनौपचारिक बैठक और जी20 शिखर सम्मेलन में सहयोग पर सहमति तक, इस मुलाकात ने दुनिया में स्थिरता और नई उम्मीद का संदेश दिया है।
समय यह साबित करेगा कि चीन के राष्ट्रीय पुनरुत्थान और “अमेरिका को फिर महान बनाने” जैसे लक्ष्य एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों देश साथ मिलकर आगे बढ़ सकते हैं और दुनिया के लिए सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

