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US-Iran तनाव के बीच नई Satellite तस्वीरों से मचा हड़कंप, क्या फिर शुरू हुआ परमाणु ठिकानों पर काम

New satellite images

Iran Nuclear Program Lateast news : अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसकी वजह हाल ही में सामने आई कुछ नई सैटेलाइट तस्वीरें हैं। अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन (CNN) की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अपने कुछ संदिग्ध परमाणु ठिकानों पर दोबारा निर्माण और मरम्मत का काम कर रहा है।

यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब पिछले महीने ही अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) हुआ था। इस समझौते में ईरान ने भरोसा दिलाया था कि वह परमाणु हथियार न तो बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। लेकिन नई तस्वीरों के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या ईरान समझौते की शर्तों का पालन कर रहा है या नहीं।

सैटेलाइट तस्वीरों में क्या सामने आया
सीएनएन ने इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के साथ मिलकर कई नई सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा हलचल पारचिन (Parchin) परमाणु परिसर में देखी गई है। पारचिन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की निगरानी में रहा है। माना जाता है कि यहां पहले परमाणु हथियारों से जुड़े विस्फोटक परीक्षण किए जाने की आशंका जताई जाती रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले से पहले ईरान ने इस परिसर के चारों ओर मजबूत कंक्रीट की सुरक्षा दीवार और अन्य सुरक्षा संरचनाएं बनाई थीं। हमले के दौरान इनका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। अब जून और जुलाई में ली गई नई तस्वीरों में उसी इलाके में फिर से मरम्मत और निर्माण कार्य होता दिखाई दे रहा है।

पिकऐक्स माउंटेन में भी दिखी गतिविधि
रिपोर्ट में पिकऐक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी उल्लेख किया गया है। इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील ठिकाना माना जाता है। सैटेलाइट तस्वीरों में इस इलाके की सुरंगों के अंदर और आसपास वाहनों की आवाजाही देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां सामान्य नहीं हैं और यह संकेत देती हैं कि वहां किसी तरह का काम चल रहा है। हालांकि, केवल सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि वहां परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा काम ही हो रहा है। लेकिन इन गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

अन्य परमाणु केंद्रों की क्या स्थिति है
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्र इस्फहान, फोरडो और नतांज में फिलहाल किसी बड़े नए निर्माण या असामान्य गतिविधि के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि, कुछ मिसाइल भंडारण केंद्रों पर मरम्मत और निर्माण कार्य शुरू होने के संकेत जरूर दिखाई दिए हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देश पहले से ही ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। ऐसे में इन गतिविधियों पर भी करीबी नजर रखी जा रही है।

अमेरिका और ईरान के बीच क्या हुआ था समझौता
पिछले महीने दोनों देशों के बीच 14 सूत्रीय MoU पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत ईरान ने दोबारा यह वादा किया था कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही उन्हें प्राप्त करने की कोशिश करेगा। समझौते में यह भी तय हुआ था कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित (Enriched) यूरेनियम के भंडार से जुड़े मुद्दों का समाधान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में किया जाएगा। इसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पारदर्शी बनाना और अंतरराष्ट्रीय भरोसा कायम रखना था।

क्या समझौते का उल्लंघन हुआ
नई सैटेलाइट तस्वीरों के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या ईरान ने समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही समय बाद उसकी शर्तों का उल्लंघन करना शुरू कर दिया है। हालांकि, अब तक ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि ईरान ने वास्तव में परमाणु हथियार कार्यक्रम दोबारा शुरू कर दिया है। फिलहाल यह तस्वीरें केवल निर्माण और गतिविधियों के संकेत देती हैं। इनका अंतिम निष्कर्ष आगे की जांच और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

आगे क्या हो सकता है
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही युद्धविराम (सीजफायर) समाप्त होने की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है। यदि भविष्य में जांच में यह साबित होता है कि ईरान ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा सकते हैं। वहीं, यदि गतिविधियां केवल क्षतिग्रस्त ढांचों की मरम्मत तक सीमित हैं, तो स्थिति अलग हो सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ईरान के इन परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की जांच और दोनों देशों के आधिकारिक बयानों से ही साफ हो पाएगा कि इन सैटेलाइट तस्वीरों का वास्तविक मतलब क्या है

 

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