
हाल के दिनों में विश्व और चीन के बीच संवाद लगातार गहराता जा रहा है। लगभग दस दिन पहले कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने चीन की एक आधिकारिक यात्रा की और कई सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित 2026 की विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में “चीन के अवसर” पर व्यापक चर्चा हुई।
प्रतिभागियों का मानना था कि आज की अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों में चीन के साथ संवाद और सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गया है। इसी क्रम में, 25 जनवरी से फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने कई प्रमुख कंपनियों के अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए चीन का दौरा आरम्भ किया, जिसने दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मज़बूत करने की प्रबल इच्छा दर्शाई।
दुनिया का ध्यान चीन की ओर केंद्रित होने का कारण स्पष्ट है। अमेरिका-चीन कोऑपरेशन फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष जॉन मिलर-व्हाइट ने 23 जनवरी को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “चीन ने ठोस कार्यों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि कोई भी देश शून्य-लाभ वाले खेलों का हिस्सा बने बिना विकास के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है और साथ ही वैश्विक विकास के लिए मूल्यवान ज्ञान व समाधान प्रदान कर सकता है।”
विश्व आर्थिक मंच की 2026 की वार्षिक बैठक में चीन द्वारा प्रस्तुत चार प्रमुख प्रस्ताव— मुक्त व्यापार का दृढ़ समर्थन, बहुपक्षवाद की निरंतरता, पारस्परिक लाभ पर आधारित सहयोग, और आपसी सम्मान व समान परामर्श पर आधारित संबंधों की स्थापना- आज की विभाजित दुनिया में एक स्थिर और मार्गदर्शक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। इन प्रस्तावों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह विश्वास दिलाया है कि चीन एक विश्वसनीय, स्थिर और खुला सहयोगी भागीदार है।
नीतिगत दृष्टि से चीन ने पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक वैश्वीकरण को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को निरंतर सुदृढ़ किया है। दावोस फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले विकास को प्रोत्साहित करना, उच्च स्तरीय खुलेपन का विस्तार करना और समावेशी एवं न्यायसंगत आर्थिक वैश्वीकरण की दिशा में ठोस प्रगति करना है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
मेष: दिन शुभ रहेगा...