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अमेरिका से राहत की खबर: इन दवाओं पर नहीं लगेगा 100% टैरिफ, पढ़ें खबर

Donald Trump

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वॉशिंगटन: भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए अमेरिका से एक बड़ी राहत की खबर आई है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि देश में बिकने वाली जेनेरिक दवाओं को संभावित 100% टैरिफ से छूट दी जा सकती है। यह कदम उन अटकलों पर विराम लगा सकता है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित दवाओं पर भारी शुल्क लगाने की योजना के बाद शुरू हुई थीं।

अमेरिकी मीडिया, खासकर वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अपने टैरिफ नीति में कुछ नरमी बरत सकता है और जेनेरिक दवाओं को शुल्क से बाहर रख सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह भारत के लिए बेहद सकारात्मक संकेत होगा, क्योंकि भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

फार्मा शेयरों में दिखी तेजी

जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई, भारतीय शेयर बाजार में फार्मा स्टॉक्स में हलचल देखने को मिली। कई प्रमुख फार्मा कंपनियों के शेयरों में तेजी आई और निवेशकों ने इस सेक्टर में बढ़ती संभावनाओं को भांपते हुए खरीदारी तेज कर दी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेनेरिक दवाएं टैरिफ से बाहर रहीं, तो यह फार्मा कंपनियों के मुनाफे और निर्यात दोनों को बल देगा।

टैरिफ का प्रस्ताव, लेकिन जेनेरिक पर चुप्पी

दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा-232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए फार्मा उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया था। यह शुल्क 1 अक्टूबर से लागू किया जाना था, लेकिन फिलहाल इसे टाल दिया गया है। खास बात यह है कि इस घोषणा में जेनेरिक दवाओं का नाम नहीं लिया गया था, जिससे संभावना बनी हुई थी कि इन्हें टैरिफ से बाहर रखा जाएगा।

भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

भारत से अमेरिका को होने वाले दवा निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा जेनेरिक मेडिसिन्स का होता है। यदि इन पर टैरिफ लगाया जाता, तो इससे न केवल भारतीय फार्मा कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ता, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी सस्ती दवाएं मिलने में कठिनाई होती।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह संभावित फैसला दोनों देशों के बीच फार्मा व्यापार को और मजबूती देगा। साथ ही, इससे अमेरिकी स्वास्थ्य तंत्र को भी राहत मिलेगी, जो जेनेरिक दवाओं पर काफी हद तक निर्भर है।

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