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परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान, बनी सहमति, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दावा

Nuclear weapon

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Nuclear weapon: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है। ट्रंप ने इसे हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव समाप्त करने वाले एक ऐतिहासिक शांति समझौते का हिस्सा बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि तेहरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया गया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना उनकी सरकार की नीति का मुख्य उद्देश्य रहा है। कर्मचारियों और समर्थकों से ट्रंप ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, हमने होर्मुज स्ट्रेट में संघर्ष को खत्म करने के लिए ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौता किया है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि इस समझौते से दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने में मदद मिली है। ट्रंप ने कहा, “बीते दिन, होर्मुज स्ट्रेट से 19 मिलियन बैरल तेल निकला। यह इस स्ट्रेट के इतिहास में सबसे अधिक तेल प्रवाह था।”

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सैन्य ढांचे को नुकसान
उन्होंने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम एक चीज सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे और वे इस बात पर सहमत हो गए हैं।” राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान के सैन्य ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हम ईरान को बिना नौसेना, बिना वायुसेना, बिना एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम, बिना मिसाइल क्षमता और बिना परमाणु कार्यक्रम के छोड़ रहे हैं। हम उन्हें बिना किसी परमाणु क्षमता के छोड़ रहे हैं और वे इस पर सहमत हो गए हैं।”

ट्रंप ने तर्क दिया कि पिछली अमेरिकी सरकारें इस मुद्दे को हल करने में विफल रही थीं। उन्होंने कहा, “याद रखें, यह आसान नहीं था। 47 सालों तक राष्ट्रपति और अन्य लोग रहे, और अन्य देश भी थे। हम अकेले ऐसे नहीं थे जिन्होंने कुछ नहीं किया।”

ईरानी अर्थव्यवस्था को भारी क्षति
इसी दौरान, राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की अर्थव्यवस्था और रक्षा क्षेत्र को भी भारी क्षति हुई है। ट्रंप ने कहा, “ईरान की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई है और उनके रक्षा औद्योगिक आधार को इतना गंभीर नुकसान पहुंचा है कि उन्हें इसे फिर से बनाने में कई साल लगेंगे।”

अपने भाषण में ट्रंप ने संकेत दिया कि व्यापक मध्य-पूर्वी अस्थिरता को रोकने के लिए यह संघर्ष जरूरी था। उन्होंने कहा, “हमें यह रास्ता अपनाना पड़ा। आप उन्हें पूरे मध्य पूर्व को तबाह करने की अनुमति नहीं दे सकते और फिर संभवतः हमें भी।”

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हथौड़े जैसी कार्रवाई का जिक्र
ईरान की न्यूक्लियर सुविधाओं के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी ऑपरेशन की सराहना भी की। उन्होंने कहा, “सभी समझते हैं कि ‘हथौड़ा’ (सख्त कार्रवाई) जरूरी था। हमने बी-2 बॉम्बर्स से उनकी न्यूक्लियर क्षमता का क्या हाल किया, सबने देखा और यह सचमुच एक ‘हथौड़े’ जैसी कार्रवाई थी।”

तेहरान के साथ बातचीत के लिए तैयार अमेरिका
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वाशिंगटन, तेहरान के साथ आगे बातचीत करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वे ठीक हो जाएंगे। वे वही करेंगे जो उन्हें करना है, क्योंकि हम चाहते हैं कि ऐसा हो।” फिलहाल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार ध्यान बना हुआ है।

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