इंटरनेशनल डेस्क। दुनिया भर में डाक्टरों को भगवान का रूप माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा होगा कि डाक्टर जहर वाला इंजेक्शन देकर मरीजों का जान भी ले सकते हैं। जी हां, जर्मनी से एक ऐसा ही मामला सामने आया जो इस भरोसे को हिला देने वाला है। जहां, मरीज को ठीक करने की जगह नर्स ने कई लोगों को जहरीला इंजेक्शन लगाकर जान ले लिया।
महिला डाक्टर को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा
बताया जा रहा है कि जर्मनी के पश्चिमी हिस्से के वुर्सेलन शहर के एक अस्पताल में एक नर्स ने ऐसा अपराध किया, जिसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता।अदालत ने उस नर्स को 10 मरीजों की हत्या करने और 27 अन्य मरीजों को मारने की कोशिश करने के जुर्म में आजीवन कारावास (life imprisonment) की सजा सुनाई है। अदालत ने नर्स का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। जांच में पता चला कि नर्स को रात की ड्यूटी (night shift) पसंद नहीं थी और काम का बोझ उसे परेशान करता था। गुस्से और चिड़चिड़ेपन में उसने अपनी झुंझलाहट मरीजों पर निकाल दी और बुजुर्ग मरीजों को जहरीले इंजेक्शन लगाकर मार डाला।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि नर्स में मरीजों के प्रति कोई दया या सहानुभूति नहीं थी। वह चिड़चिड़ेपन में इस हद तक चली गई कि अपनी गुस्सा मिटाने के लिए लोगों की जान लेने लगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नर्स ने 37 से ज्यादा मरीजों की जान खतरे में डाली थी। अब यह भी जांच हो रही है कि उसके काम के दौरान अन्य मरीजों पर तो कोई असर नहीं पड़ा।
कब से कर रही थी काम
दोषी नर्स ने 2007 में नर्सिंग की ट्रेनिंग पूरी की थी और 2020 में वुर्सेलन अस्पताल में नौकरी शुरू की थी। उसके खिलाफ शिकायतें बढ़ने के बाद 2024 में पुलिस ने गिरफ्तार किया। अदालत ने कहा कि उसका अपराध “बेहद गंभीर और अमानवीय” है, क्योंकि उसने अपनी जिम्मेदारी का गलत इस्तेमाल किया।
पहले भी हुआ था ऐसा मामला
जर्मनी में यह पहला मामला नहीं है जब किसी नर्स ने मरीजों की जान ली हो। अदालत ने इस मामले की तुलना नील्स होगेल (Niels Högel) नाम के नर्स से की है।नील्स होगेल को 2019 में उम्रकैद की सजा दी गई थी, क्योंकि उसने 1999 से 2005 के बीच 85 मरीजों की हत्या की थी। वह अब तक का जर्मनी का सबसे बड़ा सीरियल किलर नर्स माना जाता है।
लोगों का भरोसा टूटा
यह मामला दिखाता है कि कैसे कभी-कभी मेडिकल फील्ड में भी ऐसे लोग पहुंच जाते हैं जो मरीजों की सेवा नहीं, बल्कि नुकसान करते हैं। ऐसे अपराधों से न केवल मरीजों की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि समाज का भरोसा भी टूट जाता है।
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