Dainik Savera Times

मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान का नया दांव, FATF बैठक से पहले वॉन्टेड लिस्ट में डाला नाम

Pakistan adds Masood Azhar to wanted list ahead of FATF meeting

नई दिल्ली: पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने 2026 के लिए मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की नई सूची जारी की है। इस सूची में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के प्रमुख मसूद अजहर का नाम भी शामिल किया गया है। FIA ने मसूद अजहर पर घोषित इनाम को बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया है।

हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान ने यह कदम अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक से पहले उठाया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिखाना चाहता है कि वह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है और दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में आने से बचना चाहता है।

मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान के दावे पर सवाल

पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि मसूद अजहर देश में नहीं है और वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। 2021 में भी पाकिस्तान की ओर से इसी तरह के दावे किए गए थे। FIA ने उस समय भी मसूद अजहर के खिलाफ इनाम घोषित किया था। अब करीब पांच साल बाद यह रकम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी गई है। मसूद अजहर पर भारत में कई आतंकवादी हमलों की साजिश रचने के आरोप हैं, जिनमें 2019 का पुलवामा हमला भी शामिल है।

हालांकि, भारतीय खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि तकनीकी निगरानी और विश्लेषण के आधार पर मसूद अजहर के पाकिस्तान में ही छिपे होने के संकेत मिले हैं। सूत्रों का दावा है कि वह पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह इलाके में सक्रिय रूप से छिपा हुआ है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

26/11 हमले से जुड़े लोगों के नाम भी सूची में

FIA की नई रेड बुक में 26/11 मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इन लोगों पर हमलावरों की मदद करने, उन्हें आर्थिक सहायता देने या समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने में भूमिका निभाने के आरोप हैं। सूत्रों के मुताबिक, इनमें से 17 लोगों के नाम के साथ उनकी तस्वीरें और हमले में उनकी कथित भूमिका दर्ज की गई है। वहीं, दो लोगों के मामले में उनकी तस्वीर और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े होने की जानकारी कथित तौर पर हटा दी गई है और सिर्फ नाम रखा गया है।

इनमें तुर्बत के मुहम्मद खान का नाम शामिल है। उस पर कथित तौर पर हमलावरों को मुंबई ले जाने के लिए _अल-हुसैनी_ नाव उपलब्ध कराने का आरोप है। इसी तरह बहावलनगर के अब्दुल रहमान का नाम भी सूची में है। सूत्रों का दावा है कि 2021 की FIA सूची में दोनों की तस्वीर और उनकी कथित भूमिका का ज्यादा विस्तृत विवरण मौजूद था।

26/11 के लिए आर्थिक मदद देने वालों के नाम

FIA की सूची में उन लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिन पर 26/11 हमले के लिए लश्कर-ए-तैयबा को आर्थिक मदद देने का आरोप है। इनमें मुहम्मद इफ्तिखार अली, मोहम्मद जिया, मोहम्मद अब्बास नासिर, जावेद इकबाल, मुख्तार अहमद और अहमद सईद के नाम बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन लोगों ने अलग-अलग रकम के जरिए हमले के लिए कथित तौर पर मदद की थी।

FIA का कहना है कि 26/11 हमलों से जुड़े ये लोग करीब 18 साल से फरार हैं। वहीं, भारतीय खुफिया सूत्रों का दावा है कि ये सभी पाकिस्तान में ही मौजूद हैं। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पाकिस्तान की मोस्ट वांटेड सूची में बढ़ोतरी

FIA की रेड बुक के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की संख्या पिछले पांच वर्षों में काफी बढ़ी है। 2021 की सूची में जहां 1,330 नाम थे, वहीं नई सूची में यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है। यानी इस दौरान करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

बहावलपुर में JeM के ठिकाने पर भारत का ऑपरेशन सिंदूर

मसूद अजहर और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बहावलपुर के मरकज सुभान अल्लाह का भी रिपोर्ट में जिक्र है। यह ठिकाना JeM की गतिविधियों और प्रशिक्षण से जुड़ा बताया जाता है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर में इस ठिकाने को निशाना बनाने की बात कही थी। भारतीय सेना के अनुसार, मरकज सुभान अल्लाह को नुकसान पहुंचाया गया था। यह स्थान पाकिस्तान की सीमा के भीतर करीब 100 किलोमीटर दूर बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, मरकज सुभान अल्लाह JeM के प्रशिक्षण और वैचारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां संगठन के कैडरों को कथित तौर पर हथियारों, शारीरिक प्रशिक्षण और धार्मिक विचारधारा से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती रही है। मसूद अजहर और JeM के अन्य वरिष्ठ सदस्यों के इस परिसर से जुड़े होने की भी रिपोर्टें सामने आती रही हैं। भारत मसूद अजहर और JeM को कई आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ता रहा है।

फिलहाल, FIA की नई रेड बुक को लेकर पाकिस्तान की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि केवल किसी व्यक्ति का नाम मोस्ट वांटेड सूची में डालना पर्याप्त नहीं है; अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह देखेगा कि पाकिस्तान वास्तव में इन आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।

Exit mobile version