Last Updated: November 5, 2026

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Pakistan: कराची कोर्ट ने सिविल हॉस्पिटल को एक महिला को 65 लाख पाकिस्तानी रुपये मुआवज़ा देने का दिया आदेश

August 12, 2026

Pakistan: कराची कोर्ट ने सिविल हॉस्पिटल को एक महिला को 65 लाख पाकिस्तानी रुपये मुआवज़ा देने का दिया आदेश

कराची [पाकिस्तान]: ARY न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, कराची की एक अदालत ने सिविल हॉस्पिटल कराची को एक महिला को 65 लाख पाकिस्तानी रुपये (PKR) का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। महिला को अस्पताल में कथित तौर पर गलत सर्जरी के बाद कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा था।

रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर सिविल जज (साउथ) ने सिविल हॉस्पिटल कराची के खिलाफ़ नज्मा रिज़वान द्वारा दायर मुआवज़े के मामले में यह आदेश दिया और अस्पताल को 60 दिनों के भीतर 65 लाख पाकिस्तानी रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया।

ARY न्यूज़ के मुताबिक, रिज़वान को 3 नवंबर, 2015 को बच्चे के जन्म के लिए सिविल हॉस्पिटल कराची में भर्ती कराया गया था और उनकी सर्जरी हुई थी। उन्हें 6 नवंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

उनके वकील ने अदालत को बताया कि छुट्टी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई; उन्हें पेट में दर्द, सूजन और अन्य समस्याएं हुईं। बाद में उन्होंने दूसरे अस्पताल में इलाज कराया, जहाँ डॉक्टरों ने कथित तौर पर पाया कि सिविल हॉस्पिटल कराची में की गई सर्जरी गलत थी।

वकील ने तर्क दिया कि सर्जरी के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण कई अतिरिक्त स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हुईं।

ARY न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने रिज़वान के पक्ष में फ़ैसला सुनाया और कराची के सिविल हॉस्पिटल को 6.5 मिलियन PKR का मुआवज़ा देने का आदेश दिया।

ARY न्यूज़ के अनुसार, इससे एक दिन पहले कंज्यूमर प्रोटेक्शन कोर्ट (ईस्ट) ने कराची के एक प्राइवेट हॉस्पिटल को खराब सर्विस और कथित मेडिकल लापरवाही के लिए एक महिला को 500,000 PKR का मुआवज़ा देने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने हॉस्पिटल को मुकदमे का खर्च उठाने के लिए 200,000 PKR देने का भी निर्देश दिया और लगभग 1.8 मिलियन PKR के विवादित अतिरिक्त बिल को माफ़ कर दिया।

हालांकि, कोर्ट ने हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के लिए दिए गए 2.2 मिलियन PKR के रिफ़ंड के लिए महिला के दावे को खारिज कर दिया, साथ ही नर्सिंग देखभाल, फिजियोथेरेपी और दवाओं के लिए 4.516 मिलियन PKR के हर्जाने के उसके अलग दावे को भी खारिज कर दिया।

ARY न्यूज़ के अनुसार, कोर्ट ने पाया कि हॉस्पिटल का अपना डॉक्टर भी यह नहीं बता सका कि शुरू में सही जगह पर लगाया गया कैथेटर धमनी (आर्टरी) के अंदर कैसे पहुँच गया।

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