
इंटरनेशनल डेस्क: पाकिस्तान की जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने शुक्रवार को देश की सेना पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान को एक और युद्ध में नहीं उलझना चाहिए, क्योंकि इससे देश की स्थिति और खराब हो जाएगी।
मौलाना रहमान ने सेना के मौजूदा रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान को अपनी पुरानी गलतियों से सबक लेना चाहिए। 1971 का बांग्लादेश युद्ध और 1999 का कारगिल युद्ध हमें नहीं भूलना चाहिए। इन दोनों युद्धों में पाकिस्तान की सेना की गलत नीतियों ने देश की साख को गहरा नुकसान पहुंचाया। उन्होंने पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ और अन्य सैन्य अधिकारियों की नीतियों को भी इसके लिए जिम्मेदार बताया।
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वास्तविक मुद्दों पर ध्यान दे सेना
फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी सेना को सलाह दी कि वह सीमा पर लड़ाई करने के बजाय देश के अंदरूनी मुद्दों जैसे आतंकवाद, आर्थिक संकट और प्रशासनिक अस्थिरता पर ध्यान केंद्रित करे। उन्होंने कहा कि सेना जनता के बीच डर का माहौल बनाकर गलत कर रही है। इस्लाम किसी भी मुस्लिम देश के खिलाफ अन्यायपूर्ण हमला करने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अफगानिस्तान के प्रति सेना के आक्रामक रवैये को गैर-इस्लामी और आत्मघाती बताया।
भारत पर भी पड़ा असर
रिपोर्टों के अनुसार, रहमान का यह बयान भारत के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह बयान अफगान तालिबान की एक मनोवैज्ञानिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जो पाकिस्तान की आंतरिक एकता को कमजोर कर सकती है।
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भारत यात्रा पर जाना चाहते हैं मौलाना
जानकारी के मुताबिक, मौलाना फजलुर रहमान भारत की यात्रा करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे शांति का संदेश लेकर भारत आना चाहते हैं। उनके करीबी सहयोगी और सांसद कामरान मुरतजा ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने मौलाना रहमान का शांति संदेश एक भारतीय राजनयिक को भी सौंपा है।
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