
Peter Navarro : डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार Peter Navarro ने एक बार फिर भारत की व्यापार नीतियों, रूस से तेल खरीद और चीन के साथ संबंधों को लेकर तीखा हमला बोला है। एक साक्षात्कार में नवारो ने कहा कि भले ही भारत और अमेरिका के बीच संवाद जारी है, लेकिन व्यापार के मोर्चे पर भारत “अभी भी सबसे कठिन देश” बना हुआ है।
“भारत के टैरिफ दुनिया में सबसे ज़्यादा”
नवारो ने कहा, “भारत बातचीत की मेज पर आ रहा है, यह अच्छी बात है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक सौहार्दपूर्ण ट्वीट किया और राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। लेकिन जब बात व्यापार की आती है, तो भारत अब भी सबसे ज़्यादा टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं लागू करता है। यह हर मायने में अनुचित व्यापार है।” उन्होंने कहा कि अमेरिका को भारत के साथ भी वैसा ही सख्त रवैया अपनाना चाहिए, जैसा वह अन्य देशों जैसे चीन और यूरोप के साथ करता है।
“रूसी तेल पर भारत का रुख डाकुओं जैसा”
पीटर नवारो ने भारत द्वारा रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदने को लेकर भी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, “2022 से पहले भारत ने कभी रूसी तेल नहीं खरीदा था। लेकिन यूक्रेन युद्ध के तुरंत बाद, भारतीय रिफाइनर रूसी सप्लायर्स से सस्ते में कच्चा तेल खरीदने लगे। यह डाकुओं जैसा व्यापार है। यह अमेरिका से अनुचित फायदा उठाने और रूस को फंडिंग देने जैसा है। यह दोहरी नीति नहीं तो और क्या है?” नवारो का मानना है कि इससे अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान हो रहा है और अमेरिका के करदाताओं पर दबाव बढ़ रहा है क्योंकि उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध में अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
“भारत का चीन और रूस से जुड़ना चिंताजनक”
साक्षात्कार में नवारो ने हाल ही में हुई एक बैठक की ओर इशारा करते हुए कहा कि पीएम मोदी का रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक मंच पर नजर आना अमेरिका के लिए स्ट्रैटेजिक खतरे की घंटी है। “भारत जैसे लोकतांत्रिक देश का अपने ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्वी चीन के साथ खुला मंच साझा करना हैरान करने वाला है। चीन भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक खतरा रहा है। और अब वे एक साथ बैठकर रूस के साथ मिलकर क्या संकेत दे रहे हैं? यह अमेरिका के लिए एक कूटनीतिक चुनौती बन चुका है।”
अमेरिका-भारत संबंधों में फिर आएगी तल्खी?
नवारो का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौतों पर गहन चर्चा चल रही है। हाल ही में पीएम मोदी और ट्रंप के बीच सोशल मीडिया पर सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई थी, जिसे विशेषज्ञ द्विपक्षीय संबंधों के सुधार की दिशा में एक कदम मान रहे थे। लेकिन नवारो जैसे प्रभावशाली ट्रंप समर्थकों के बयानों से यह साफ है कि ट्रंप भारत पर फिर से दबाव डाल सकते है।
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