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Spain और Portugal में बिजली संकट से मचा हाहाकार… रेल सेवाएं और इंटरनेट सेवा ठप

बार्सिलोना: स्पेन और पुर्तगाल में सोमवार को अचानक आई भीषण बिजली कटौती ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। दोपहर बाद शुरू हुए इस ब्लैकआउट ने कुछ ही पलों में पूरे इबेरियन प्रायद्वीप को अंधेरे में डुबो दिया। हजारों यात्री ट्रेनों में फंस गए, जबकि करोड़ों लोग बिना बिजली, इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क के जीने को मजबूर हो गए।

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए बताया कि दोपहर 12:33 बजे के करीब केवल पाँच सेकंड के भीतर ही 15 गीगावाट बिजली गायब हो गई—जो राष्ट्रीय मांग का लगभग 60% हिस्सा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मंगलवार तक देशभर में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। सोमवार रात तक लगभग 50% क्षेत्र में बिजली लौट चुकी थी।

-इन बड़े शहरों में शहरों में कार्यालय बंद

इस अभूतपूर्व संकट ने न सिर्फ दैनिक जीवन को प्रभावित किया, बल्कि अर्थव्यवस्था और संचार प्रणाली को भी ठप कर दिया। लिस्बन और मैड्रिड जैसे बड़े शहरों में कार्यालय बंद हो गए, एटीएम और पेट्रोल पंप काम नहीं कर रहे थे, और मोबाइल नेटवर्क लगभग निष्क्रिय हो गए थे। बार्सिलोना में तो हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ नागरिकों को स्वयं यातायात नियंत्रित करना पड़ा।

-रेल सेवाओं पर पड़ा सीधा असर

स्पेन में 100 से अधिक ट्रेनें ट्रैक पर रुक गईं, जिससे करीब 35,000 लोग फंसे रहे। आपातकालीन सेवाओं और रेलकर्मियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन देर रात तक 11 ट्रेनों के यात्रियों को सुरक्षित निकालना बाकी था। पुर्तगाल के साइबर सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह कटौती किसी साइबर हमले का नतीजा नहीं है। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष टेरेसा रिबेरा ने इसे हाल के वर्षों में यूरोप की सबसे गंभीर ऊर्जा आपदाओं में से एक बताया।

-यूरोपीय देश को करना पड़ा रहा संकट का सामना

यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब यूरोप पहले ही ऊर्जा आपूर्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर दबाव में है। विशेषज्ञ अब इस घटना के मूल कारणों का पता लगाने में जुटे हैं। यह दूसरी बार है जब छह सप्ताह के भीतर किसी यूरोपीय देश को इस तरह के ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा है—20 मार्च को ब्रिटेन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर आग के कारण बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। बिजली संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकसित देशों में भी ऊर्जा व्यवस्था कितनी संवेदनशील है, और अब यह ज़रूरी हो गया है कि वैकल्पिक और सुरक्षित ऊर्जा उपायों की ओर ठोस कदम उठाए जाएं।

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