मास्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रविवार को यूक्रेन के साथ “सीधी बातचीत” की अपील की, जिसमें उन्होंने संघर्ष के मूल कारणों को हल करने और स्थायी शांति की दिशा में कदम उठाने की बात की। पुतिन का यह बयान यूरोपीय नेताओं की हालिया यात्रा के बाद आया, जिन्होंने रूस से बिना शर्त 30 दिनों के युद्धविराम पर सहमत होने की मांग की थी।
-पुतिन ने मीडिया में ब्यान में कहा
पुतिन ने कहा, “हम गंभीर और रचनात्मक बातचीत चाहते हैं, जो न केवल संघर्ष को खत्म करे, बल्कि एक मजबूत और स्थायी शांति की ओर भी ले जाए।” यह टिप्पणी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के यूक्रेन दौरे और रूस से 30-दिवसीय युद्धविराम की अपील करने के बाद आई। इन नेताओं ने रूस से तत्काल युद्धविराम पर सहमति बनाने की कोशिश की थी, ताकि युद्ध में वृद्धि को रोका जा सके और मानवता को राहत मिल सके।
हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इस प्रस्ताव पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी, यह कहते हुए कि मास्को को इस पर विचार करना होगा, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि रूस पर कोई भी दबाव डालना “बेहद बेकार” होगा। पेसकोव ने रूस की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारे लिए कोई भी दबाव अप्रभावी रहेगा, और हम किसी भी ऐसे निर्णय को बाध्य होकर नहीं लेंगे।
पुतिन ने यह भी बताया कि वह तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान से बात करेंगे और इस मुद्दे पर आगे के कदमों पर चर्चा करेंगे। एर्दोगान पहले ही यूक्रेन और रूस के बीच संवाद को बढ़ावा देने की कोशिश कर चुके हैं और उन्होंने इस क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का वादा किया है।
-यूरोपीय नेताओं की सक्रिय भूमिका और चेतावनी
इस बीच, यूरोपीय संघ के नेताओं ने अपने संयुक्त बयान में रूस से बिना शर्त युद्धविराम की मांग की। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और पोलैंड के नेता इस पहल में शामिल थे, जिसे ‘इच्छुक गठबंधन’ के रूप में जाना जाता है। ये नेता यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में शामिल हुए और उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुतिन युद्धविराम पर सहमत नहीं होते हैं, तो रूस के खिलाफ नए और बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
उनकी यह चेतावनी रूस के ऊर्जा और बैंकिंग क्षेत्रों पर नई पंक्ति के प्रतिबंधों की संभावना को उजागर करती है, जिससे रूस की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। यूरोपीय नेता इस संघर्ष को जल्दी समाप्त करने और यूक्रेन को शांति की ओर ले जाने के लिए निर्णायक कदमों का समर्थन कर रहे हैं।
-क्या हो सकता है आगे?
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने न केवल इन देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर संकट उत्पन्न किया है। दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता की संभावना अभी भी एक अनिश्चितता के घेरे में है, लेकिन पुतिन का बयान इस दिशा में एक हल्की सी उम्मीद दिखाता है। हालांकि, रूस की ओर से किए गए इनकार और शर्तों के बावजूद, युद्धविराम के प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
इस बीच, तुर्की, जो पहले से ही मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है, की कोशिश है कि दोनों देशों के बीच संवाद को फिर से जिंदा किया जा सके, ताकि किसी समझौते की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पुतिन की सीधी बातचीत की पहल से किस तरह के परिणाम निकलते हैं, और क्या यूरोपीय देशों का दबाव रूस को युद्धविराम के लिए मजबूर कर पाएगा या नहीं।
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