इंटरनेशनल डेस्क: सूडान में बीते तीन वर्षों से चल रहा गृह युद्ध अब एक गंभीर मानवीय त्रासदी में बदल चुका है। सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) के बीच जारी हिंसक संघर्ष ने देश की राजनीतिक व्यवस्था को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है। आम नागरिक सबसे ज्यादा इस जंग की कीमत चुका रहे हैं, जिनकी जान और रोजमर्रा की जिंदगी दोनों खतरे में हैं।
इसी बीच सूडान के नॉर्थ कोर्डोफान प्रांत में रहाद इलाके के पास शनिवार को एक दर्दनाक ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई, जिनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मरने वालों में दो नवजात शिशु भी थे। बताया जा रहा है कि हमला उस वाहन पर किया गया, जिसमें दुबेकिर क्षेत्र से जान बचाकर भाग रहे विस्थापित लोग सवार थे। इस हमले का आरोप सूडान के कुख्यात अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्स पर लगाया गया है।
घटना के बाद सूडान के डॉक्टर्स नेटवर्क ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने अपील की है कि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और इस तरह के हमलों के लिए आरएसएफ के शीर्ष नेतृत्व को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाए। हालांकि, इस हमले को लेकर आरएसएफ की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि सूडान में हालात अप्रैल 2023 में उस समय बिगड़ गए थे, जब सेना और आरएसएफ के बीच सत्ता को लेकर टकराव खुले युद्ध में बदल गया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अब तक इस संघर्ष में 40 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि राहत एजेंसियों का कहना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है। इस युद्ध के कारण लगभग 1.4 करोड़ लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि देश के कई हिस्सों में भुखमरी, बीमारी और अकाल जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे सूडान आज दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है।

