मास्को: रूस और यूरोपीय संघ (EU) के बीच तनावपूर्ण संबंधों में एक और कड़ी जुड़ गई है। रूसी विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि उसने यूरोपीय संघ के संस्थानों, सदस्य देशों और अन्य पश्चिमी देशों के प्रतिनिधियों पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों की सूची को महत्वपूर्ण रूप से विस्तृत कर दिया है। यह कदम यूरोपीय संघ द्वारा रूस पर लगाए गए 17वें और 18वें प्रतिबंध पैकेजों के जवाब में उठाया गया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस नई विस्तारित सूची में यूरोपीय सरकारों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, वाणिज्यिक और शैक्षणिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हैं, जिन्हें यूक्रेन को सैन्य और द्वैत्य-उपयोग उत्पादों की आपूर्ति में सहयोग देने, बाल्टिक सागर में रूसी नौवहन को बाधित करने और रूस की क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डालने जैसी गतिविधियों का दोषी ठहराया गया है।
“राजनीतिक अभियोजन” का किया समर्थन
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित व्यक्तियों में वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने रूसी अधिकारियों के खिलाफ कथित “राजनीतिक अभियोजन” का समर्थन किया है, या यूक्रेन से जुड़े युद्ध अपराधों के लिए रूस के शीर्ष नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल बनाने की वकालत की है।
इन प्रतिबंधों की सूची में यूरोपीय संसद के सदस्य
रूसी संपत्तियों को ज़ब्त करने और उन्हें कीव सरकार को हस्तांतरित करने की मांग करने वाले अधिकारी, और मुखर रूस-विरोधी विचारधारा रखने वाले शिक्षाविद भी शामिल हैं। रूस ने इन प्रतिबंधों को “राजनीतिक रूप से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण” बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया है।
रूसी मंत्रालय की चेतवनी
रूसी मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी कि यदि यूरोपीय संघ भविष्य में और प्रतिबंध लगाता है, तो रूस उसके खिलाफ “समय पर और सटीक” जवाब देगा।
गौरतलब है कि EU ने 20 मई और 18 जुलाई को रूस पर 17वें और 18वें प्रतिबंध पैकेज लागू किए थे। इनमें 50 से अधिक व्यक्तियों और संस्थाओं को काली सूची में डालने के साथ-साथ रूसी तेल पर मूल्य सीमा को घटाकर 47.6 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया। इसके अलावा, रूसी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर भी पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है।

