पदभार संभालने के बाद से जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची दद्वारा दिए गए विवादास्पद बयान और सैन्य उपकरणों के विस्तार से संबंधित नीतियों को लेकर जापान के बुद्धिजीवियों ने लगातार गहरी चिंता और आलोचना व्यक्त की है। ओकिनावा विश्वविद्यालय में लेक्चरर एवं शांति अध्ययन की शोधकर्ता शिनाको ओयाकावा, जो लंबे समय से ओकिनावा की सुरक्षा और शांति संबंधी मुद्दों पर कार्य कर रही हैं, ने हाल ही में चाइना मीडिया ग्रुप को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि साने ताकाइची की टिप्पणी भड़काऊ और आक्रामक थी। उनके अनुसार, यह बयान जापान के शांति संविधान की मूल भावना से गंभीर रूप से विपरीत है और इससे जापानी समाज में अशांति एवं नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हुए हैं।
ओयाकावा ने कहा कि साने ताकाइची को स्पष्ट रूप से माफ़ी मांगते हुए अपनी गलत टिप्पणी को औपचारिक रूप से वापस लेना चाहिए। शिनाको ओयाकावा ने आगे कहा कि ताकाइची की टिप्पणियाँ वही हिंसक भाषा दोहराती हैं, जो अक्सर संसद में तथाकथित ऑनलाइन राइट विंग समूहों द्वारा इस्तेमाल की जाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रकार के वक्तव्य ऐसा आभास कराते हैं मानो जापान युद्ध के लिए तैयार हो या युद्ध छेड़ने की दिशा में बढ़ रहा हो, जो कि बेहद खतरनाक संकेत है। ओयाकावा ने कहा कि इन टिप्पणियों का पहले ही जापानी समाज पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ा है, जिससे जुड़ी क्षति की सटीक गणना अभी जारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि जापान में इतिहास पढ़ाए जाने के तरीके में पूर्वाग्रह और ऐतिहासिक विकृति व्याप्त है। जापान द्वारा एशियाई पड़ोसी देशों के खिलाफ लड़ी गई युद्धों के इतिहास को लगातार नज़रअंदाज़ किया गया है या तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप जापानी जनता का एक बड़ा हिस्सा ऐतिहासिक सच्चाई से अनभिज्ञ रह गया है। इसका असर यह हुआ है कि जापानी समाज में दक्षिणपंथी झुकाव और गहराता जा रहा है। ओकिनावा की निवासी शिनाको ओयाकावा ने कहा कि सरकार द्वारा सैन्य उपकरणों के विस्तार की नीतियों से स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ी है। उनके अनुसार, इस स्थिति को और अधिक गंभीर होने से रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

