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एससीओ शिखर सम्मेलन 2025: थ्येनचिन में एकता, सहयोग और विकास का महोत्सव

August 16, 2025

एससीओ शिखर सम्मेलन 2025: थ्येनचिन में एकता, सहयोग और विकास का महोत्सव

31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच चीन के थ्येनचिन शहर में आयोजित होने वाला शांगहाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन इतिहास का सबसे बड़ा सम्मेलन होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शिरकत करेंगे। यह सम्मेलन एससीओ की विकास यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ेगा। 

पिछले वर्ष जुलाई में चीन द्वारा एससीओ की अध्यक्षता संभालने के बाद से, चीन ने “शांगहाई भावना को कायम रखना: एससीओ आगे बढ़ रहा है” के नारे पर काम किया है, एससीओ अध्यक्ष के रूप में ठोस प्रगति की है, और सकारात्मक प्रगति और परिणाम हासिल किए हैं।

पहला, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग गहरा हुआ है। एससीओ अध्यक्ष के रूप में चीन ने 100 से ज़्यादा कार्यक्रमों की मेजबानी की है, और उनमें से लगभग आधे संस्थागत कार्यक्रम हैं, जिनमें राजनीति, सुरक्षा, सैन्य, अर्थव्यवस्था और व्यापार, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा, संपर्क, तकनीकी नवाचार, हरित उद्योग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं। इन कार्यक्रमों ने एससीओ देशों को एकजुटता और आपसी विश्वास बढ़ाने, आपसी सीख को बढ़ाने और पारस्परिक रूप से लाभकारी और समान परिणाम  प्राप्त करने में मदद की है।

दूसरा, संगठन के तंत्र में सुधार किया गया है। चीन ने सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर विचार-विमर्श तंत्र, सहयोग पद्धति और स्थायी निकायों जैसे विभिन्न पहलुओं में सुधार और नवाचार को आगे बढ़ाया है, ताकि संगठन का सुचारू और अधिक कुशल संचालन सुनिश्चित हो सके। सभी पक्ष सुरक्षा खतरों और चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक केंद्र, एक सूचना सुरक्षा केंद्र, एक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध निरोधक केंद्र और एक मादक द्रव्य निरोधक केंद्र की स्थापना के संबंध में परामर्श में तेज़ी ला रहे हैं, ताकि कानून प्रवर्तन और सुरक्षा पर सहयोग को मज़बूत किया जा सके और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के लिए एक नया प्रतिमान स्थापित किया जा सके।

इस बैठक से पहले भारत और चीन के संबधों पर जमी बर्फ भी पिघल रही है, ज्ञात हो कि हाल ही में चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को तकरीबन 5 साल के अंतराल के बाद खोल दिया जिससे भारत के लोग पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकें। इसके बाद भारत ने भी चीन के  पर्यटकों के लिए अपने द्वार खोल दिए और हाल ही में खबर आई है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO शिखर सम्मेलन भाग लेने के लिए चीन रवाना होंगे। यह खबर ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर दोहरा टेरिफ लगाया है।  

थ्येनचिन शिखर सम्मेलन एकता, मित्रता और सहयोग का प्रतीक बनेगा। सभी सदस्य देशों के संयुक्त प्रयासों से यह आयोजन न केवल ऐतिहासिक होगा, बल्कि इससे विश्व शांति, स्थिरता और समृद्धि को नई दिशा मिलेगी। एससीओ अधिक एकजुटता, अधिक सहयोग, अधिक गतिशीलता और अधिक उपलब्धियों के साथ उच्च-गुणवत्ता विकास के एक नए चरण में प्रवेश करेगा। यह मंच अब केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक साझेदारी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विज्ञान, शिक्षा, पर्यटन और हरित विकास जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

दुनिया इस समय जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों और वैश्विक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में एससीओ जैसी बहुपक्षीय संस्थाएं शांति, स्थिरता और विकास के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं। थ्येनचिन सम्मेलन यह साबित करेगा कि सहयोग और संवाद के माध्यम से सभी देशों की साझा समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।

थ्येनचिन एससीओ शिखर सम्मेलन 2025 एक भव्य, ऐतिहासिक और परिणामकारी आयोजन साबित होगा। यह सम्मेलन न केवल एससीओ के लिए बल्कि समूचे विश्व समुदाय के लिए एकता, सहयोग और समावेशी विकास का सशक्त संदेश देगा। सभी देशों की संयुक्त भागीदारी और सक्रिय सहयोग से यह आयोजन एक नई वैश्विक शुरुआत का प्रतीक बनेगा।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)

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