इंटरनेशनल डेस्क: ईरान के वरिष्ठ नेता और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने नेताओं और नागरिकों की मौत का बदला जरूर लेगा। लारीजानी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग ईरान के खिलाफ हमले कर रहे हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। ईरान अपने लोगों के खून को बेकार नहीं जाने देगा और इसका जवाब दिया जाएगा।
लारीजानी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले करने के आरोप लगा रहे हैं। लारीजानी ने दावा किया कि ईरान अमेरिका और इस्राइल के कई ठिकानों को निशाना बना रहा है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को लगा था कि वह इस युद्ध को बहुत जल्दी जीत लेगा, लेकिन इस बार उसकी योजना सफल नहीं हो पाई है।
इससे पहले शनिवार को लारीजानी ने एक और बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा कि ईरान ने कई अमेरिकी सैनिकों को पकड़ लिया है और उन्हें जेल में रखा गया है। हालांकि, अमेरिका ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि ईरान की ओर से किए गए ये दावे झूठे हैं और इनका कोई आधार नहीं है।
लारीजानी ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप ईरान के हमलों में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं। उनका कहना है कि आधिकारिक तौर पर छह सैनिकों की मौत की बात कही जा रही है, जबकि असल में मरने वालों की संख्या 500 से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका धीरे-धीरे मौतों के आंकड़े बढ़ाकर सामने लाता है और कई बार इन्हें दुर्घटना या अन्य कारण बताकर छिपाने की कोशिश करता है। लारीजानी का यह भी दावा है कि कुछ अमेरिकी सैनिकों को ईरान ने बंदी बना लिया है, लेकिन अमेरिका उन्हें युद्ध में मारा गया बताकर सच छिपा रहा है।
इधर क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई भी जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल ने रविवार को ईरान के तेल से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। वहीं ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps ने दावा किया कि उन्होंने बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि इस अड्डे का इस्तेमाल उनके एक जल शोधन संयंत्र पर हमला करने के लिए किया गया था।
खाड़ी क्षेत्र में लगातार हो रहे इन हमलों के कारण तनाव और बढ़ गया है। हालात को देखते हुए यरूशलेम और दोहा समेत कई इलाकों में हवाई हमले की चेतावनी जारी की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो यह संघर्ष और भी गंभीर रूप ले सकता है।
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