इंटरनेशनल डेस्क: फ्रांस इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। लगातार बढ़ते तापमान का असर लोगों की सेहत पर गंभीर रूप से पड़ रहा है। देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के दौरान गर्मी से जुड़ी वजहों के कारण करीब 1,000 लोगों की मौत हो गई है। सबसे ज्यादा असर राजधानी पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में देखने को मिला। यहां घरों के अंदर होने वाली मौतों की संख्या अचानक बढ़ गई। बुधवार को, जब तापमान अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा, उस दिन 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके बाद गुरुवार और शुक्रवार को यह आंकड़ा बढ़कर प्रतिदिन 1,400 से अधिक हो गया।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सामान्य दिनों में फ्रांस में हर दिन लगभग 900 से 1,000 लोगों की मौत होती है। लेकिन भीषण गर्मी के कारण यह संख्या काफी बढ़ गई। मरने वालों में करीब 85 प्रतिशत लोग 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों पर अत्यधिक गर्मी का सबसे ज्यादा असर पड़ता है, इसलिए उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
WHO ने दी गंभीर चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने कहा है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। यहां तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है। इस समय यूरोप में लगभग 15 करोड़ लोग भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। कई देशों में गर्मी के कारण स्कूल बंद करने पड़े हैं, जबकि कुछ इलाकों में बिजली की मांग बढ़ने से बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को बताया बड़ी वजह
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी केवल प्राकृतिक मौसम का हिस्सा नहीं है। उनका मानना है कि जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे हीटवेव पहले की तुलना में ज्यादा खतरनाक और लंबे समय तक रहने लगी हैं।
कई यूरोपीय देशों में टूटे तापमान के रिकॉर्ड
फ्रांस के अलावा जर्मनी, पोलैंड और चेक गणराज्य में भी इस बार गर्मी ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जर्मनी के नीसेमुंडे क्षेत्र में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। चेक गणराज्य में पारा 41.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है।
पोलैंड में भी तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो आने वाले वर्षों में यूरोप को और भी गंभीर हीटवेव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को गर्मी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

