इंटरनेशनल डेस्क : शांगहाई सहयोग संगठन (SCO) एक प्रमुख अंतरसरकारी संगठन है जिसकी स्थापना 15 जून, 2001 को चीन, कजाकिस्तान, किर्गिज़स्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। आज यह संगठन 9 सदस्य देशों, 3 पर्यवेक्षक देशों और 14 डायलॉग पार्टनर्स के साथ एक प्रभावशाली मंच बन चुका है।
SCO की स्थापना का मूल उद्देश्य था सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ाना, सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य सहयोग को मजबूत करना और आतंकवाद, चरमपंथ व अलगाववाद जैसे “तीन बुराइयों” के विरुद्ध एकजुट होकर कार्य करना। बीते दो दशकों में SCO ने न केवल मध्य एशिया में शांति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है, बल्कि यह धीरे-धीरे वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक संतुलन को प्रभावित करने वाला एक शक्तिशाली संगठन बन चुका है।
इस संगठन ने क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देते हुए RATS (Regional Anti-Terrorist Structure) की स्थापना की, जिससे आतंकवादी गतिविधियों के विरुद्ध संयुक्त कार्यवाही की जा सके। इसके अलावा, SCO आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय सहयोग को भी बढ़ावा देता है, जिससे इसके सदस्य देशों के बीच समग्र विकास को गति मिली है।
चीन की भूमिका: नेतृत्व और रणनीतिक संतुलन
चीन, SCO का संस्थापक सदस्य होने के नाते, इस संगठन में एक स्थायी और निर्णायक भूमिका निभाता आ रहा है। आर्थिक संसाधनों, राजनीतिक प्रभाव और कूटनीतिक सक्रियता के चलते चीन संगठन के विभिन्न पहलुओं में अग्रणी भूमिका निभाता है।
1. सुरक्षा सहयोग में नेतृत्व: चीन RATS के माध्यम से आतंकवाद-विरोधी अभियानों में सक्रिय भागीदार रहा है। सीमा पार सुरक्षा, साइबर आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ रणनीतिक सहयोग में उसकी पहल निर्णायक रही है।
2. आर्थिक विकास की दिशा में मार्गदर्शन: बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) जैसे बहुपक्षीय आर्थिक प्रयासों के माध्यम से चीन ने SCO देशों में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और व्यापारिक सहयोग को बल दिया है। इससे न केवल सदस्य देशों के बीच आपसी निर्भरता बढ़ी है, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक संतुलन भी सशक्त हुआ है।
3. कूटनीतिक संतुलन और संवाद: SCO के भीतर विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक विविधताओं के बीच संतुलन बनाए रखने में चीन ने हमेशा संयमित और समावेशी नीति अपनाई है। भारत और पाकिस्तान जैसे विरोधी देशों को संगठन में सदस्यता दिलाना इसकी मिसाल है।
चीन इस शरद ऋतु में उत्तरी शहर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, चीन में आधुनिक औद्योगिक सभ्यता के अग्रदूत के रूप में, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के निर्माण में भूमि-समुद्री चौराहे और न्यू यूरेशियन लैंड ब्रिज में एक महत्वपूर्ण धुरी के रूप में, तियानजिन एक संपन्न महानगर के रूप में विकसित हुआ है जहां नवाचार और वैश्विक व्यापार फल-फूल रहे हैं।
जुलाई 2024 में अस्ताना शिखर सम्मेलन के बाद, चीन 2024-2025 के लिए SCO की अध्यक्षता संभालेगा और SCO के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 25वीं बैठक की मेजबानी करेगा। चीन राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में 100 से अधिक कार्यक्रमों की मेजबानी करेगा, जिसका उद्देश्य विकास के लिए खाका तैयार करना, सहयोग पर आम सहमति बनाना और साझा भविष्य के साथ एक करीबी एससीओ समुदाय के निर्माण को बढ़ावा देना है। इस वर्ष का विषय है “शांगहाई भावना को कायम रखना: SCO आगे बढ़ रहा है।” हम शांगहाई भावना को आगे बढ़ाने और SCO विकास को बढ़ावा देने के लिए वास्तविक कार्रवाई करेंगे। नेता हैहे नदी के किनारे एकत्र होकर SCO की उपलब्धियों पर विचार करेंगे, भविष्य की योजना बनाएंगे और सहयोग के लिए आम सहमति बनाएंगे। इससे SCO को चीन से एक नई यात्रा शुरू करने और संगठन को साझा भविष्य वाला एक अधिक घनिष्ठ समुदाय बनाने में मदद मिलेगी।
विश्व राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और सुरक्षा चुनौतियों के बीच SCO एक वैकल्पिक बहुपक्षीय मंच बनकर उभरा है। यह संगठन ना केवल पश्चिम-प्रधान वैश्विक व्यवस्था को संतुलित करता है, बल्कि वैश्विक दक्षिण के लिए एक साझा आवाज भी प्रस्तुत करता है। 23 वर्षों में SCO ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक शांति और विकास में भी योगदान दिया है। चीन की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व ने इस संगठन को एक प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय मंच बनाया है। तियानजिन शिखर सम्मेलन में SCO के भविष्य की दिशा और नई पहलों पर चर्चा होगी, जो एशिया और विश्व के लिए महत्वपूर्ण होगी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)

