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शांघाई सहयोग संगठन विश्व मंच पर सकारात्मक भूमिका निभाएगा

इस सदी की शुरुआत से अब तक अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर सबसे प्रभावशाली घटनाओं में से एक है ब्रिक्स और शांघाई सहयोग संगठन की स्थापना है। ब्रिक्स देश समान राष्ट्रीय परिस्थितियों वाली कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं जो आर्थिक विकास के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक साथ आते हैं। उधर, शांघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ मूल रूप से चीन, रूस और मध्य एशियाई देशों के द्वारा स्थापित एक आतंकवाद विरोधी गठबंधन था। भारत और पाकिस्तान के संगठन में शामिल होने के साथ ही इस संगठन ने एक क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठन का महत्व प्राप्त कर लिया है। हाल ही में, शांघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में से एक, एससीओ थिंक टैंक मीडिया फोरम, चीन में आयोजित किया गया। इस संगठन की स्थापना 2001 में हुई थी और इसके सदस्यों में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान और ईरान शामिल हैं।

 

प्रथम शांघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन 15 जून, 2001 को चीन के शांघाई शहर में आयोजित किया गया। आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का मुकाबला करना हमेशा से इस संगठन की मूल उद्देश्य रहता है। मध्य एशियाई क्षेत्र ने विश्व के इतिहास में हमेशा एक विशेष और महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है और यह अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोध के लिए भी एक महत्वपूर्ण मुख्य क्षेत्र है। मध्य एशिया चीन, रूस, भारत, ईरान और पाकिस्तान के केंद्र में स्थित है, और चीन का “बेल्ट एंड रोड” निर्माण भी इस क्षेत्र से होकर गुजरता है। यों तो मध्य एशिया विश्व के आतंकवाद-विरोधी प्रयासों का मुख्य क्षेत्र है, पर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी प्रयासों में मुख्य शक्ति चीन, रूस और अन्य देशों के पास है। यह कहा जा सकता है कि चीन और रूस के पूर्ण समर्थन के बिना मध्य एशिया में आतंकवादी गतिविधियां नियंत्रण से बाहर हो जाने का खतरा है। इसलिए, चीन और रूस न केवल आतंकवादी गतिविधियों के मुख्य शिकार हैं, बल्कि आतंकवादी संगठनों को दबाने वाली सबसे शक्तिशाली ताकतें भी हैं।

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शांघाई सहयोग संगठन की स्थापना चीन द्वारा की गई और इसका मुख्यालय चीन के शांघाई शहर में स्थित है, जो चीन का आर्थिक केंद्र है। इस महा शहर में मजबूत आर्थिक और तकनीकी ताकत, सुविधाजनक संचार और समुद्री और भूमि परिवहन स्थितियां हैं। एससीओ शांघाई के माध्यम से दुनिया पर अपना अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव डालता है। वर्तमान में, एससीओ में 10 सदस्य देश, 2 पर्यवेक्षक देश और 10 साझेदार संवाद देश हैं। सदस्य देशों का क्षेत्रफल 37 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक है, तथा इसकी कुल जनसंख्या 3.6 बिलियन से अधिक है, जो विश्व की कुल जनसंख्या का 50% है। इसके सदस्य देशों का कुल सकल घरेलू उत्पाद 25 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है। यह कहा जा सकता है कि एससीओ पहले से ही आतंकवाद से लड़ने के उद्देश्य से दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संगठन है, और यह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-विरोध में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है।

 

एक क्षेत्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में शांघाई सहयोग संगठन ने बदलती अंतर्राष्ट्रीय स्थिति की परीक्षा को झेला है और धीरे-धीरे परिपक्व हुआ है। अब तक, इसने “शांघाई सहयोग संगठन चार्टर” जैसे दर्जनों दस्तावेजों को पारित किया है, सचिवालय और क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी एजेंसियों को लॉन्च किया है, और एक अपेक्षाकृत पूर्ण संगठनात्मक संरचना और कानूनी प्रणाली स्थापित की है। एससीओ सदस्यों के बीच सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, व्यापार, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ा है, तथा संयुक्त राष्ट्र, आसियान और सीआईएस जैसे अंतर्राष्ट्रीय या क्षेत्रीय संगठनों के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित हुए हैं। संगठन को व्यापक अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है, विशेष रूप से पारस्परिक विश्वास, पारस्परिक लाभ, समानता, परामर्श, विविध सभ्यताओं के प्रति सम्मान और आम विकास की खोज की “शांघाई भावना” को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा आम तौर पर मान्यता दी गई है। शांघाई सहयोग संगठन निश्चित रूप से अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर अधिक सक्रिय ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

 

 

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