Site icon Dainik Savera Times

नहीं काम आईं दुआएं… वार्ता विफल से टूटा शहबाज शरीफ का ग्‍लोबल पीस मेकर बनने का सपना

Shehbaz Sharif

Shehbaz Sharif

इंटरनेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में डेढ़ महीने से ज्यादा समय से चल रहे संघर्ष ने पूरी दुनिया को अस्थिर कर दिया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से तेल और गैस की सप्लाई एशिया से लेकर यूरोप तक बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी संकट को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू हुई थी, लेकिन 12 अप्रैल 2026 को यह कोशिश नाकाम हो गई।

क्यों टूटी अमेरिका-ईरान वार्ता?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत टूट गई है। अमेरिका ने ईरान के सामने अंतिम प्रस्ताव रखा था, लेकिन तेहरान ने उसे मानने से इनकार कर दिया। वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका उस पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश कर रहा था, जो उसे मंजूर नहीं थीं। इस टकराव के बाद क्षेत्र में शांति की उम्मीद लगभग खत्म होती नजर आ रही है और युद्ध और ज्यादा बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

पाकिस्तान की भूमिका और आलोचना

इस बातचीत की मेजबानी पाकिस्तान कर रहा था। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रहे थे। इस्लामाबाद के होटल खाली करवा दिए गए। राजधानी में छुट्टी घोषित की गई। सोशल मीडिया और मीडिया में लगातार प्रचार किया गया। कुछ जगहों पर पोस्टर लगाकर नेताओं के लिए नोबेल पुरस्कार की मांग तक होने लगी, लेकिन वार्ता टूटने के बाद यह पूरा प्रयास विफल साबित हुआ और पाकिस्तान की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठने लगे।

दुआ भी काम नहीं आईं

वार्ता शुरू होने से पहले शहबाज शरीफ ने लोगों से सामूहिक दुआ करने की अपील की थी। उन्होंने इसे सिर्फ कूटनीतिक मौका नहीं, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति लाने का अवसर बताया था। हालांकि, बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई और दोनों देशों के प्रतिनिधि वापस लौट गए। ग्‍लोबल पीस मेकर बनने का पाकिस्‍तान का सपना टूट गया।

बातचीत के मुख्य बिंदु

अमेरिका का अंतिम प्रस्ताव: अमेरिका ने कहा कि उसने अपना सबसे अच्छा प्रस्ताव दे दिया है, अब फैसला ईरान को करना है।

ट्रंप से संपर्क: बातचीत के दौरान टीम लगातार डोनाल्ड ट्रंप से सलाह लेती रही।

सुरक्षा टीम की भूमिका: अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम पूरी तरह सक्रिय रही।

ईरान की शर्त: ईरान चाहता है कि अमेरिका अपनी कुछ शर्तों में बदलाव करे।

आगे की संभावना: मतभेद कम करने की कोशिश जारी है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।

आसिम मुनीर की छवि पर असर

इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व आसिम मुनीर कर रहे थे, जिन्हें पाकिस्तान का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता है। अब बातचीत के विफल होने से उनकी नेतृत्व क्षमता और अंतरराष्ट्रीय छवि को बड़ा झटका लगा है। पहले मुनीर ने अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए थे और आतंकवाद से जुड़े मामलों में सहयोग भी किया था, जिससे ट्रंप उनसे प्रभावित थे। लेकिन अब इस असफलता के बाद उनके रिश्तों और प्रभाव पर असर पड़ सकता है।

Exit mobile version