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चरवाहे से बनीं पहली तिब्बती ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता 

छैयांग शिजी ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली तिब्बती एथलीट हैं। घास के मैदान में मवेशी और भेड़ चराने वाली एक बच्ची से लेकर ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता तक, उनका हर कदम असाधारण रहा है। वे चार बार ओलंपिक खेलों में भाग ले चुकी हैं और हर बार हारने के बाद उनका दृढ़ निश्चय और बढ़ जाता है।

नवंबर 1990 में, छैयांग शिजी का जन्म पश्चिमी चीन के छिंगहाई प्रांत के हैबेई तिब्बती स्वायत्त प्रिफ़ेक्चर के हैयेन काउंटी में एक साधारण तिब्बती चरवाहे परिवार में हुआ था। जब वे 14 वर्ष की थी, तो हैबेई तिब्बती स्वायत्त प्रिफ़ेक्चर में चौथे मिडिल स्कूल छात्र खेलों का आयोजन किया गया था, और छैयांग शिजी ने महिलाओं की लंबी दूरी की दौड़ स्पर्धा में दूसरा स्थान जीता। इसके बाद छैयांग शिजी घर छोड़कर ट्रैक एवं फील्ड का अभ्यास करने के लिए खेल स्कूल आ गयीं। खेल स्कूल के दौरान, छैयांग शिजी को अपना मंच मिल गया। यद्यपि प्रशिक्षण कठिन था, फिर भी उन्होंने इसका आनंद लिया।

2009 में, छैयांग शिजी ने चीन रेस वॉकिंग ग्रैंड प्रिक्स में भाग लिया, और उत्कृष्ट परिणामों के साथ महिलाओं के 20 किमी वयस्क समूह में चौथा स्थान जीता। इसके बाद, उन्हें चीनी राष्ट्रीय पैदल चाल टीम के लिए चुना गया। 2012 लंदन ओलंपिक में, पहली बार ओलंपिक मंच पर दिखाई देने वाली छैयांग शिजी ने महिलाओं की 20 किमी पैदल चाल दौड़ में 1 घंटा, 25 मिनट और 16 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता, साथ ही एशियाई रिकॉर्ड तोड़ दिया, और चीनी ट्रैक और फील्ड टीम के लिए सम्मान जीता। अप्रत्याशित बात यह है कि दस साल बाद, तत्कालीन चैंपियन और उपविजेता को डोपिंग के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया और उनकी जगह तीसरे स्थान पर रही छैयांग शिजी को लंदन ओलंपिक के 20 किमी पैदल चाल चैंपियन नियुक्त किया गया।

रेस वॉकिंग में 20 वर्षों से शामिल रहने के दौरान, छैयांग शिजी ने अपनी अदम्य दृढ़ता और प्रथम स्थान जीतने के दृढ़ विश्वास के साथ अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू प्रतियोगिताओं में 20 से अधिक चैंपियनशिप जीती हैं। उनके प्रभाव और प्रोत्साहन के तहत, विभिन्न जातीय समूहों के युवाओं ने प्रतिस्पर्धी खेलों के लिए खुद को समर्पित किया है, अपने सपनों को पूरा किया है और जीवन के मूल्य को समझा है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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