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ईरान के हमलों से बढ़ा तनाव : UAE-बहरीन में बजे सायरन, सऊदी-कतर ने की जवाबी कार्रवाई

Iran's attacks escalate tensions

इंटरनेशनल डेस्क: खाड़ी क्षेत्र में मंगलवार को तनाव चरम पर पहुंच गया जब ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और सऊदी अरब को लक्षित कर ताबड़तोड़ हमले किए। ईरानी हमले अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों के प्रतिशोध के रूप में किए गए। दुबई और बहरीन में सायरन बजने लगे, जबकि सऊदी अरब ने अपने तेल समृद्ध पूर्वी क्षेत्र में 2 ड्रोन मार गिराए। कुवैत ने भी 6 ड्रोन को रोकने में सफलता पाई।

ईरान ने इन हमलों में अमेरिकी सैन्य बेस के साथ-साथ ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया। इससे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बिगड़ गए हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर संकट, वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित

ईरान के इस बढ़ते प्रभाव और होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों के आवागमन पर रोक के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी संकट पैदा हो गया है। यह स्ट्रेट दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्ग है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने बताया कि मर्चेंट जहाजों पर हुए हमलों में कम से कम 7 नाविक मारे गए हैं, जिससे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है।

अमेरिका की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह स्थिति अस्थायी है और लंबे समय तक नहीं चलेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में तेल के प्रवाह को बाधित करता है, तो अमेरिका उसके खिलाफ अब तक के हमलों से 20 गुना अधिक कड़ा जवाब देगा।

ईरान का जवाब और कूटनीतिक खाई

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने कहा कि युद्ध की समाप्ति का निर्णय केवल ईरान करेगा। सुप्रीम लीडर के विदेश नीति सलाहकार कमाल खराजी ने CNN को बताया कि ईरान लंबी लड़ाई के लिए तैयार है और फिलहाल कूटनीति की कोई गुंजाइश नहीं है, जब तक अमेरिका और इज़राइल के हमले जारी हैं।

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हिंसा और मौतों का आंकड़ा

उत्तरी इराक में एक एयरस्ट्राइक में ईरान समर्थक 5 आतंकवादी मारे गए। इस हमले में किरकुक स्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज की 40वीं ब्रिगेड को निशाना बनाया गया। अब तक संघर्ष में ईरान में 1,230 से अधिक, लेबनान में 397 और इज़राइल में 11 लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिकी सेना के कम से कम 7 सदस्यों की मौत हुई है।

इज़राइल ने लेबनान में हिज़बुल्लाह पर हमले तेज कर दिए हैं। युद्ध के कारण विदेशी नागरिक खाड़ी के व्यावसायिक केंद्रों से पलायन कर रहे हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। हमले सैन्य अड्डों, सरकारी इमारतों, तेल और पानी सुविधाओं, होटलों और स्कूलों तक फैल गए हैं।

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