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ताकि जापान के सीवेज के लिए डंपिंग ग्राउंड न बने प्रशांत महासागर…

April 23, 2023

ताकि जापान के सीवेज के लिए डंपिंग ग्राउंड न बने प्रशांत महासागर…

“हमारे वंशजों को परमाणु सीवेज विरासत में न दें!” यह दक्षिण कोरिया के एक वृद्ध किमजंग-जा का क्रोधित रोना है, जो 60 वर्षों से समुद्र के पास रहते हैं। 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस है, जो विश्व कानून दिवस भी है। फुकुशिमा परमाणु दूषित पानी को समुद्र में छोड़ने की जापानी सरकार की योजना का विरोध करने के लिए दुनिया भर के कई एनजीओ और पर्यावरण संगठनों ने गतिविधियों का आयोजन किया। ग्रीन पीस ने भी कुछ दिनों पहले एक लेख जारी कर संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून संधि का उल्लंघन करने वाली जापान सरकार की कार्रवाई की आलोचना की और आरोप लगाया कि जापान अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने में विफल रहा है।
जब दो साल पहले जापान सरकार ने सीवेज को समुद्र में छोड़ने की योजना की घोषणा की, तब से विरोध और संदेह की आवाज़ें उठने लगी हैं। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के विरोध के बावजूद, जापान सरकार अभी भी परमाणु दूषित पानी को समुद्र में छोड़ने की योजना को आगे बढ़ाने पर जोर देती है, भले ही अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने संबंधित आकलन रिपोर्ट जारी नहीं की। जापानी अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्री यसुतोशीनिशिमुरा ने 20 अप्रैल को कहा कि इस साल के वसंत और गर्मियों में जापान यह काम शुरू करेगा और संभवतः जुलाई माह में औपचारिक रूप से परमाणु दूषित पानी को समुद्र में छोड़ेगा। टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने 21 अप्रैल को कहा कि परमाणु दूषित पानी के निर्वहन के लिए पनडुब्बी सुरंग जून के अंत से पहले पूरी होने की उम्मीद है। फुकुशिमा प्रांत के गवर्नर मसाओउचिबोरी ने 23 अप्रैल से यूरोप का दौरा करना शुरू किया, जिसका उद्देश्य जी-7 से समुद्री जल निकासी योजना का समर्थन प्राप्त करना है।
जापान सरकार ने परमाणु-दूषित पानी से निपटने का सही तरीका खोजने पर ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि समुद्र के निर्वहन योजना के नुकसान को कम करने और कवर करने की पूरी कोशिश की।
वैश्विक दृष्टि कोण से परमाणु दूषित पानी के समुद्र में छोड़े जाने की कोई मिसाल नहीं है। 2011 में हुई फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना अब तक की सबसे गंभीर परमाणु दुर्घटनाओं में से एक है। उत्पादित परमाणु दूषित पानी में 60 से अधिक प्रकार के रेडियोन्यूक्लाइड होते हैं। कई शोधों से पता चला है कि एक बार समुद्र में छोड़े जाने के बाद, ये रेडियोधर्मी पदार्थ समुद्री पर्यावरण को प्रदूषित करेंगे, और खाद्य श्रृंखला के माध्यम से अंततः मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएंगे।
वर्तमान में, फुकुशिमा परमाणु ऊर्जा संयंत्र में 13 लाख टन से अधिक परमाणु-दूषित पानी जमा है और हर दिन 100 टन से अधिक नए उत्पन्न होते हैं, और निर्वहन का समय 30 वर्ष या उस से भी अधिक होगा। परमाणु-दूषित पानी के विशाल भंडार से कैसे निपटा जाए, जापानी पक्ष के पास अन्य विकल्प भी हैं, जैसे फॉर्मेशन इंजेक्शन, स्टीम डिस्चार्ज, हाइड्रोजन डिस्चार्ज और अंडर ग्राउंड दफन इत्यादि। हालांकि, पैसे और परेशानी को बचाने के लिए, जापान सरकार ने उन्हें समुद्र में छोड़ने का निर्णय लिया, जिससे व्यापक रूप से पूछताछ की गई और आलोचना की गई।
सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि जापान सरकार ने सुरक्षित निपटान के तरीके ढूंढने की कोशिश नहीं की और पड़ोसी देशों के साथ पर्याप्त परामर्श किए बिना समुद्र में सीवेज के निर्वहन की योजना बनायी, जिसने सबके गुस्से को जगा दिया।
इस वर्ष के पृथ्वी दिवस की थीम है “हमारे ग्रह में निवेश”। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर दुनिया से एक स्वस्थ और सतत अर्थव्यवस्था बनाने का आह्वान किया।परमाणु-दूषित पानी का निर्वहन जापान का निजी मामला नहीं है, बल्कि सभी मानव जाति के सतत विकास से संबंधित एक “सार्वजनिक मामला” है। प्रशांत महासागर जापान के सीवेज के लिए डंपिंग ग्राउंड नहीं है, बल्कि एक सार्वजनिक संसाधन है जो कई देश अस्तित्व के लिए भरोसा करते हैं। जापान को वस्तुनिष्ठ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परमाणु-दूषित पानी से निपटने के लिए सुरक्षित तरीकों का उपयोग करना चाहिए। इससे पहले जापानी पक्ष को प्राधिकरण के बिना कार्य नहीं करना चाहिए।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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