Last Updated: September 21, 2026

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आतंकवाद से कैसे निपटेगा दक्षिण एशिया…?

November 15, 2025

आतंकवाद से कैसे निपटेगा दक्षिण एशिया…?

इंटरनेशनल डेस्क : फिलहाल भारत की राजधानी और पाकिस्तान की राजधानी में 24 घंटे अंदर क्रमशः आतंकवादी बम विस्फोट हुए, जिस में भारी जनहानि हुई। इन धमाकों से यह उजागर हुआ है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद के विरोध की स्थिति गंभीर और जटिल बनी रही है। दक्षिण एशिया की शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए और मशक्कत करने की ज़रूरत है।

दिल्ली में कार विस्फोट के बाद भारत सरकार ने बड़ी सावधानी दिखायी और जल्दबाजी में निष्कर्ष नहीं निकाला। दो दिन के बाद ही मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति ने उसे भयानक आतंकवादी घटना बतायी, जो राष्ट्र विरोधी शक्तियों से रची गयी। सरकार ने यथाशीघ्र ही अपराधियों और उन के समर्थकों का पता लगाने और उन को कटघरे में रखने का वादा दिया। उधर इस्लामाबाद में बम विस्फोट के तुरंत बाद पाक सरकार ने पुष्टि की यह पाक तालिबान द्वारा किया गया आतंकवादी हमला है। उस दिन पाकिस्तान तालिबान ने बयान जारी कर इस घटना की जिम्मेदारी ली।

दोनों विस्फोटों को देखा जाए, तो भारत और पाकिस्तान के सुरक्षा कार्य में स्पष्ट खामियां दिखी हैं। दिल्ली विस्फोट के मुख्य आरोपी उमर मुहम्मद विस्फोटक से भरी कार चलाकर फरीदाबाद से दिल्ली पहुंचा। वह लाल किले के पास एक पार्किंग स्थल में लगभग तीन घंटे ठहरा। लाल किला भारत के लैंडमार्क में से एक है, जो उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है। पर उमर किसी सुरक्षा जांच से नहीं गुज़रा। गौरतलब है कि विस्फोट के दिन और एक दिन के पहले सुरक्षाकर्मियों ने फरीदाबाद में उमर से सम्बंधित तीन व्यक्तियों के निवास में करीब 3 हजार विस्फोटक पदार्थ बरामद किये थे। लेकिन कोई आपात या प्रभावकारी ऐहतियाती कदम नहीं उठाये गये।

इस्लामाबाद में विस्फोट जी-11 क्षेत्र में हुआ, जो पाक के केंद्रीय प्रशासनिक इलाकों में से एक है। ऐसी जगह में धमाका करना पाक सत्ता से खुलेआम ललारने जैसा था। इस घटना से शहर के केंद्र में सुरक्षा कार्य की कमजोरी दर्शायी गयी है। उल्लेखनीय बात है कि इस धमाके के एक दिन पहले पाक सेना ने उत्तर पश्चिम में एक सैन्य स्कूल पर आतंकवादी हमला नाकाम किया था। कहा जा सकता है कि पाकिस्तान में लगातार होने वाले आतंकवादी हमलों की स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया है। पाकिस्तान आतंकवाद के अधिक खतरे का सामना कर रहा है। शायद इसी कारण पाक रक्षा मंत्री असीफ ने कहा कि पाक युद्ध में है।

आतंकवाद का विरोध एक व्यवस्थित परियोजना है, जिसमें वर्तमान नाजुक मुद्दों और मूल मुद्दों दोनों के समाधान को जोड़कर चतुर्मुखी नीतियों के कार्यांवयन की आवश्कता है। भारत और पाकिस्तान के लिए फौरन कार्य पुख्ता प्रमाण के आधार पर कानून के मुताबिक आतंकवादियों को दृढ़ता से सज़ा देना है ताकि न्याय दिलाया जाए। पर चिरस्थाई स्थिरता साकार करने के लिए आतंकवाद के पनपने की भूमि मिटाना है। दक्षिण एशिया में आतंकवाद के स्रोत बहुत जटिल हैं, जिनमें भू-राजनीति, धार्मिक उग्रवाद, जातीय प्रतिद्वंद्व, आर्थिक व सामाजिक सवाल, बाहरी शक्ति के हस्तक्षेप जैसे कई तत्व शामिल हैं। इसी कारण लंबे समय से इस क्षेत्र के आतंकवाद विरोधी संघर्ष बड़ी मुश्किल से चलते आये हैं।

विश्लेषकों के विचार में वास्तविक स्थिति के मद्देनजर दक्षिण एशियाई देश आतंकवाद की जड़ मिटाने के लिए तीन पहलुओं में कोशिश कर सकेंगे। पहला, चरमपंथी विचारों के नियंत्रण पर अधिक जोर लगाया जाए। भारत एक बहुजातीय, बहुधार्मिक और बहु सांस्कृतिक देश है। चरमपंथी विचारों से विभिन्न समुदायों के बीच बैर और घृणा पैदा होती है, जो आतंकवादी कार्रवाई को उकसावा देती है। पाकिस्तान में पाक तालिबान की मौजूदगी का आधार चरमपंथी धार्मिक विचार है।

दूसरा, आर्थिक व सामाजिक विकास में समावेश और संतुलन पर अधिक जोर लगाया जाए। दक्षिण एशिया में गरीब जनसंख्या बहुत बड़ी है और अमीर-गरीब की खाई विशाल है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आतंकवादी शक्ति से ज्यादा प्रभावित होता है। आतंकवादी संगठन अकसर उनमें नये सदस्यों की भर्ती कराते हैं।

तीसरा, क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी सहयोग चलाया जाए। इसके लिए भारत पाकिस्तान सम्बंध के सुधार को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। अगर दक्षिण एशिया में दो सबसे बड़े देशों के सम्बंधों में गतिरोध तोड़कर एक हद तक सुलह प्राप्त की गयी, तो क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी सहयोग का द्वार खुल जाएगा, जो सीमा पार आतंकवाद को काबू में लाने के लिए बहुत अहम है। भारत और पाकिस्तान के समक्ष सबसे अहम मिशन विकास करना है। उनके बीच मौजूद वाद-विवाद का समाधान अंत में वार्ता से किया जा सकता है। इतिहास से साबित हो चुका है कि सैन्य तरीके से काम नहीं चलता।

दक्षिण एशिया में आतंकवाद का विरोध करना न सिर्फ क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे वैश्विक राजनीतिक व आर्थिक परिस्थिति पर भी प्रभाव पड़ता है। आतंकवाद विरोधी कार्य चुनौतीपूर्ण है और रास्ता लंबा है, लेकिन बेहतर भविष्य के लिए कठिनाइयों के बावजूद आगे बढ़ना ज़रूरी है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

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