Nepal Protest: इन दिनों नेपाल में हालात बेहद बेकाबू हो गए हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार जनता के गुस्से पर काबू पाने में पूरी तरह नाकाम रही। वहीं, नेपाल में हिंसा इतनी भड़क उठी कि, 8 सितंबर को Gen-Z युवाओं ने भारी प्रदर्शन शुरू कर दिया। जिसमें गुस्साई भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर संसद परिसर में प्रवेश कर लिया।
नेपाल में भारी विरोध प्रदर्शन, कई लोगों की मौत
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। हालात इतने बिगड़ गए कि भीड़ ने संसद भवन को आग के हवाले कर दिया। वहीं स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देख प्रधानमंत्री ओली अपने कुछ मंत्रियों के साथ हेलीकॉप्टर से काठमांडू छोड़कर चले गए। फिलहाल वे कहां हैं, इसका पता नहीं चल सका है। भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के कारण जनता का गुस्सा पहले से ही उबाल पर था, लेकिन सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर रोक लगाने के फैसले ने आग में घी डालने का काम किया।

वही आपको बता दें कि सत्तासीन लोगों के भ्रष्टाचार के चलते पिछले चार वर्षों में भारत के करीबी चार देशों की जनता ने सरकारों का तख्ता पलट किया। दरअसल, 2021 में अफगानिस्तान, 2022 में श्रीलंका, अगस्त 2024 में बांग्लादेश और अब नेपाल में भी ऐसा हुआ है। ये चारों ही देश छोटे हैं और यहां बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा है। जनता सरकारों से तंग आ चुकी थी। चीन और अमेरिका दोनों इन चारों देशों में दखल दे रहे थे। चीन के बारे में कहा जाता है कि वह जिस देश पर मेहरबानी दिखाता है, उस देश की सरकार अस्थिर होने लगती है। यह अलग बात है कि दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश चीन के शी जिनपिंग की सरकार फिलहाल स्थिर है। 3 सितंबर को कई राष्ट्राध्यक्षों को अपनी सैन्य परेड दिखाकर शी जिनपिंग ने दिखा दिया है कि उनके हथियार और उनकी सेना बहुत मजबूत है। तो आइए खबर में विस्तार से जानते हैं…
बांग्लादेश में सरकार गिरी
2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन ने ऐसा मोड़ लिया कि 15 साल से सत्ता में बनी शेख हसीना सरकार का अंत हो गया। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 5 अगस्त 2024 को इस्तीफा दिया था। बांग्लादेश में छात्र प्रदर्शन की शुरुआत जुलाई 2024 में शाहबाग, ढाका में हुई थी जब छात्रों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। शुरुआत में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यापक जनविरोध में तब्दील हो गए। देशभर में कॉलेज और यूनिवर्सिटी परिसरों से उठी आवाज़ें सड़कों पर गूंजने लगीं।
सेना प्रमुख जनरल वकर-उज़-ज़मान ने शेख हसीना को 45 मिनट का अल्टीमेटम दिया था कि वे या तो स्वेच्छा से पद छोड़ें या फिर सशस्त्र कार्रवाई के लिए तैयार रहें। इसके बाद हसीना और उनकी बहन को तुरंत सेना के संरक्षण में किसी अज्ञात स्थान पर पहुंचा दिया गया।
रविवार 4 अगस्त 2024 को हालात इतने बिगड़ गए कि ढाका समेत कई शहरों में हिंसक झड़पें हुईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ एक दिन में करीब 100 लोगों की जान गई। यह आंकड़ा देश के इतिहास में किसी राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान हुई सबसे बड़ी जानहानियों में से एक माना जा रहा है।
श्रीलंका में बढ़ता आर्थिक संकट
2022 में श्रीलंका भयंकर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। डॉलर खत्म, पेट्रोल नहीं, दवाएं नहीं आम जनता का गुस्सा राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे पर फूट पड़ा। लाखों लोग सड़कों पर उतरे, राष्ट्रपति भवन पर कब्जा हुआ और राजपक्षे को रातों रात देश छोड़ना पड़ा। बाद में उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। यह विद्रोह दिखाता है कि जब आर्थिक बदहाली चरम पर हो, तो जनसैलाब सत्ता की चूलें हिला सकता है।
अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी
2021 में अमेरिकी फौज के हटते ही तालिबान ने तेजी से देश के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। 15 अगस्त 2021 को काबुल पर कब्जा हुआ, राष्ट्रपति अशरफ गनी भाग गए और तालिबानी राज स्थापित हो गया। महिलाओं के अधिकारों पर पाबंदियां लगीं, कट्टर इस्लामी फरमान जारी हुए और देश गहरे आर्थिक संकट में चला गया। यह इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अब भी चिंता का कारण बना हुआ है।
पाकिस्तान के बिगड़े हालात
इमरान खान 18 अगस्त 2018 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे, जब उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सत्ता संभाली। मार्च 2022 तक उनकी सरकार के खिलाफ माहौल बनने लगा। जिसके बाद विपक्ष ने 8 मार्च 2022 को नेशनल असेंबली में इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। शुरुआत में इमरान खान ने इससे बचने की कोशिश की। उन्होंने संसद को भंग करने की सिफारिश की और नए चुनाव की मांग की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने संसद भंग करने को गैर-संवैधानिक करार दिया और आदेश दिया कि अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हो।
10 अप्रैल की रात को नेशनल असेंबली में वोटिंग हुई। इमरान खान के खिलाफ 174 सांसदों ने वोट दिया, जो साधारण बहुमत (172) से ज्यादा था। इस तरह, पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए हटाया गया। इमरान खान ने सीधे इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि उन्हें संवैधानिक रूप से पद से हटाया गया।
मेष: दिन शुभ रहेगा...