अक्टूबर की सुनहरी शरद ऋतु में, दुनिया का ध्यान एक बार फिर पेइचिंग पर केंद्रित होगा। विश्व महिला शिखर सम्मेलन, यह वह प्रतिष्ठित आयोजन है जो विश्व की आधी आबादी के विकास के रास्ते पर गहरा प्रभाव डालेग, जल्द ही आरंभ होने जा रहा है। यह सम्मेलन न केवल 30 वर्ष पहले हुए संयुक्त राष्ट्र के चौथे विश्व महिला सम्मेलन, जिसे “पेइचिंग विश्व महिला सम्मेलन” के नाम से जाना जाता है, की याद दिलाता है, बल्कि ऐसे समय में एक नई वैश्विक सहमति स्थापित करने और भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण प्रयास भी है, जब महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों के समक्ष चुनौतियाँ और अवसर दोनों मौजूद हैं।
तीन दशक पहले पेइचिंग में हुए उस ऐतिहासिक सम्मेलन ने “पेइचिंग घोषणा-पत्र” और “कार्यवाही का कार्यक्रम” के माध्यम से वैश्विक लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अमर मील का पत्थर स्थापित किया था। इसमें निहित सिद्धांत और भावना आज भी सभी देशों की नीतियों के लिए दिशा-निर्देश बने हुए हैं। दस वर्ष पहले न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित वैश्विक महिला शिखर सम्मेलन ने उस कार्य की उपलब्धियों की पुनः समीक्षा कर नई गति प्रदान की थी। पाँच वर्ष पूर्व, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दूरदर्शी सोच के साथ वर्ष 2025 में एक और वैश्विक महिला शिखर सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था, जो महिलाओं के वैश्विक हितों के प्रति चीन की निरंतर प्रतिबद्धता और स्थिर संकल्प का प्रतीक है।
अब यह पहल साकार होने जा रही है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग स्वयं उद्घाटन समारोह में भाग लेंगे और मुख्य भाषण देंगे। अनेक अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्ति, विश्व संगठनों के प्रमुख और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि इस सम्मेलन में भागीदारी करेंगे। यह आयोजन केवल स्मरणोत्सव नहीं, बल्कि एक नए ऐतिहासिक मोड़ पर उपलब्धियों पर विचार, चुनौतियों का सामना और भविष्य की दिशा पर सामूहिक विमर्श का अवसर है।
आज, वैश्विक महिला कार्य ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहाँ गंभीर चुनौतियाँ और विशाल अवसर समानांतर रूप में मौजूद हैं। एक ओर वर्ष 2030 के सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केवल पाँच वर्ष शेष हैं, फिर भी लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति विश्व के कई हिस्सों में सुस्त और असमान बनी हुई है। क्षेत्रीय संघर्ष, गरीबी, जलवायु परिवर्तन और जन स्वास्थ्य संकट जैसे मुद्दे महिलाओं के अधिकारों और उनके सर्वांगीण विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
दूसरी ओर, विश्व भर में महिलाओं की जागरूकता, भागीदारी और नेतृत्व क्षमता में निरंतर वृद्धि हो रही है। मध्य पूर्व के देशों में महिलाओं का राजनीति, सुरक्षा और वैज्ञानिक शोध जैसे परंपरागत रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में बढ़ता प्रवेश, और विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा महामारी-निरोधक प्रयासों में चीनी महिलाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन, “महिलाओं की शक्ति” के उभार को प्रकट करता है। साथ ही, डिजिटल युग ने महिला शिक्षा, उद्यमिता और वैश्विक सम्पर्क के लिए अभूतपूर्व अवसर उपलब्ध कराए हैं।
चीन सदैव से वैश्विक लैंगिक समानता और महिला विकास का दृढ़ समर्थक और सक्रिय भागीदार रहा है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस (नवंबर 2012) के बाद से, चीन में महिला कार्यों ने ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। गरीबी उन्मूलन से लेकर ग्रामीण पुनरोद्धार, शिक्षा और रोजगार से लेकर राजनीतिक सहभागिता, और स्वास्थ्य सुरक्षा से लेकर कानूनी संरक्षण तक, चीन ने महिलाओं के जीवन और अवसरों में उल्लेखनीय सुधार किए हैं। महिलाओं की सक्रियता और रचनात्मकता ने समाज के हर क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार किया है, जो “वैश्विक दक्षिण” देशों सहित विश्वभर के लिए प्रेरक उदाहरण बनी है।
पेइचिंग में होने वाला यह विश्व महिला शिखर सम्मेलन इतिहास के प्रति सम्मान और भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह सम्मेलन केवल 1995 की भावना का पुनः स्मरण नहीं बल्कि 2030 के सतत विकास एजेंडा के मध्य बिंदु पर कार्रवाई की नई पुकार है।
यह अपेक्षा की जा रही है कि सभी पक्षों के सामूहिक प्रयास से यह आयोजन वास्तव में “वैश्विक महिला हितों के विकास का एक नया मील का पत्थर” सिद्ध होगा। यह सम्मेलन लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने और महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए नई अंतरराष्ट्रीय सहमति को जन्म देगा, विश्व स्तर पर समानता और समावेशन की दिशा में नई गति प्रदान करेगा और विश्वभर की महिलाओं एवं युवतियों के लिए एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और समृद्ध भविष्य के निर्माण को प्रोत्साहित करेगा।
यह सब मानवता के साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण का अभिन्न हिस्सा है। पेइचिंग एक बार फिर वैश्विक महिला कार्यों के इतिहास में अपना सशक्त और निर्णायक योगदान देने के लिए तैयार है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

